गुरुवार, 2 अगस्त 2012

उसने कहा ओ...दुष्ट लड़की...!

तुर्की के एक व्यापारी ने पत्नी सहित , तीर्थ यात्रा पर जाते हुए अपनी इकलौती पुत्री को अपनी अरबी गुलाम युवती के साथ घर में छोड़ दिया था ! रात्रि में आवासीय उच्चतल  /  हरम में खुशी से नाचती गाती हुई दोनों युवतियों में से किसी एक के पैरों की ठोकर से चिराग बुझ गया और हरम में अंधकार छा गया !  रात गहरा चुकी थी सो उन्होंने किसी अन्य नौकर को जगाना उचित नहीं समझा , वैसे भी वे दोनों हरम के अन्दर थीं !  अरबी युवती ने तय किया कि वह खिड़की के रास्ते घर के नीचे उतरेगी और बाज़ार जाकर रौशनी के वास्ते उचित प्रबंध करेगी !  एक टोकरी को चादरों में बांध कर वह नीचे उतरी और एक रेस्तरां में जा पहुंची , जहां सारे ग्राहक जा चुके थे और उस रेस्तरां का जवान , सुंदर मालिक अगले दिन के लिए किचन /  टेबल वगैरह की सफाई में लगा हुआ था !  युवती ने उससे पूछ कर रेस्तरां में प्रवेश किया ! वहां ढेरों खाद्य सामग्री रखी थी !  युवती ने युवक से पूछा कि बड़े मर्तबानों में क्या है ? युवक ने कहा , जैतून का तेल , शहद और मक्खन ! ...शहद ?  ये क्या होता है ?  मैंने इसे कभी नहीं चखा !  कृपया मुझे इस का स्वाद लेने दें , युवती ने कहा !  युवक मर्तबान का ढक्कन खोलकर शहद निकालने झुका ही था कि युवती ने उसे धक्का दिया और फ़ौरन एक टोकरी में खाद्य पदार्थ भर लिये तथा एक चिराग उठाकर बाहर भाग निकली !  शहद से लथपथ युवक बाहर तक आया और उसने कहा ...ओह ...अरबी लड़की , अगर मैं तुम्हे कभी पकड़ पाया तो तुम्हारा खून पी जाऊंगा ! 

अगली रात जब वे दोनों युवतियां नृत्य कर रही थीं , तो अरबी गुलाम युवती , उस रेस्तरां मालिक के विषय में सोच रही थी , उसने जानबूझकर चिराग को ठोकर मारी और हरम में फिर से अंधकार छा गया !  उसने कहा मुझे बाहर जाना होगा !  चादरों के सहारे फिर से नीचे उतरकर वो पुनः उसी रेस्तरां में जा पहुंची जहां वह युवक अकेला था !  युवक ने कहा तुम्हारी इतनी हिम्मत जो तुम यहां वापस आईं ? क्या तुम्हें पता है कि अब मैं तुम्हारे साथ क्या व्यवहार करूंगा ? युवती ने कहा , तुम मुझे चूमों , यह सुनकर मुस्कराते हुए युवक ने कहा , अच्छा ... अच्छा और उसे आलिंगन में भर लिया !  युवती ने कहा , अभी नहीं पहले हम कुछ खा पी लें !  खानपान के समय युवती , युवक के प्याले में तब तक शराब डालती रही जब तक कि वह पीकर टेबल पर लुढ़क नहीं गया !  युवती ने उसे बांध दिया और खाद्य सामग्री और चिराग लेकर घर वापस चली गई  !  अगली सुबह जब ग्राहकों ने युवक को बंधन मुक्त किया तो वह बड़बड़ाया ...ओह ...अरबी लड़की , अगर मैं तुम्हे कभी पकड़ पाया तो तुम्हारा खून पी जाऊंगा !  उसी दिन फूल विक्रेता का वेश बदल कर वह गलियों में घूमने लगा ,  गुलाब ले लो...गुलाब , हांक लगाता हुआ , अंततः , उसने देखा कि एक घर के हरम की खिड़की से वो अरबी युवती झांक रही है , उसने कहा...मैंने तुम्हे ढूंढ ही लिया ! 

इसी समय अरबी गुलाम युवती अपनी मालकिन से कह रही थी कि ये वो ही रेस्तरां मालिक है , वो उसे पहचान गई थी , उसने कहा हम कुछ गुलाब लेना चाहते हैं , मगर हरम में बंद हैं , इसलिये नीचे नहीं आ सकते , क्या आप ऊपर आ सकते हैं ? उसने चादरों को नीचे लटकाया और बूढ़े फूल विक्रेता का वेश धरे हुए युवा ऊपर जाने लगा !  लेकिन उसके खिड़की तक पहुंचने से कुछ पहले ही अरबी गुलाम युवती ने चाकू से चादर काट दी , तो युवक नीचे गिर पड़ा उसे खासी चोट लगी थी ,  बाहर भीड़ होते देखकर वह वहां से कराहते हुए हट गया और उसने कहा ...ओह ...अरबी लड़की, अगर मैं तुम्हे कभी पकड़ पाया तो तुम्हारा खून पी जाऊंगा !  कुछ दिनों बाद तीर्थयात्री मालिक वापस लौट आया , अपनी पुत्री की अच्छी देखभाल से प्रसन्न होकर , उसने अरबी गुलाम युवती से पूछा , तुम्हें क्या उपहार चाहिये ? अरबी युवती ने कहा मुझे मेरे कद की रबड़ की एक गुडिया / डमी लड़की चाहिये !  जिसके कपड़े मेरे जैसे हों और जो छूने / हिलाने पर हां...हां...कहे !  इस पर मालिक ने उसकी वांछित भेंट उसे दे दी !  कुछ समय बाद मालिक ने गुलाम युवती से कहा , मुझे एक अनाम खत मिला है , जिसमें कोई तुम्हें काफी ऊंची कीमत पर खरीदना चाहता है , अगर तुम्हें आपत्ति होगी तो मैं उसे मना कर दूंगा !  गुलाम युवती ने मुस्करा कर कहा , कोई बात नहीं मुझे कोई आपत्ति नहीं है ! 

अगली सुबह एक बग्घी आई और उस गुलाम युवती को लेकर कुछ सड़क की दूरी के एक मकान तक ले गई जहां उसे उसके सामान सहित एक कक्ष में ठहरा दिया गया ! उसने रबड़ की गुडिया के अन्दर मीठा लाल शर्बत / फलों का रस भर दिया और स्वयं छुप गई ! काफी देर बाद कमरे का द्वार खुला और रेस्तरां का युवा मालिक अपने हाथ में एक चाकू लहराते हुए अंदर आया , उसने कहा ओ...दुष्ट लड़की , अंततः मैंने तुम्हें पकड़ ही लिया ! उसने गुड़िया का कंधा पकड़कर हिलाते हुए कहा , तुम्हें याद है कि तुमने मुझे शहद पर धकेल दिया था , इसपर  गुड़िया  से आवाज़ आई , हां ...हां... और क्या तुम्हें याद है कि तुमने मुझे बांध दिया था ?  गुड़िया ने कहा हां...हां... इसके बाद तुमने मुझे सड़क पर गिराया था ?  गुड़िया  यथावत बोलती रही हां...हां ...युवक ने कहा जब तुमने सब कुछ स्वीकार कर लिया है तो अब मरने के लिए तैयार हो जाओ , उसने चाकू  गुड़िया  के अन्दर धंसा दिया ,  गुड़िया गिर गई , उससे लाल तरल बह निकला जिसकी कुछ बूंदे युवक के मुंह में लगी , वह हतप्रभ हुआ , अरे इसका खून तो मीठा है , अगर उसका खून इतना मीठा है तो वह स्वयं भी कितनी अच्छी / मीठी रही होगी ?  उसे ज़िंदा रहना चाहिये था , ये मैंने क्या किया ? दुनिया की सबसे प्यारी युवती को मार डाला !  

अगर मैं उसे वापस ला सकता तो उसे आज़ाद कर देता और मैं उससे शादी कर सकता था पर अब देर हो चुकी है अब कुछ नहीं हो सकता ! पश्चाताप वश वह स्वयं को मारने के लिए चाकू उठाता है !  तभी युवती कहती है , मैं यहां हूं वो डमी है ! युवक उसे देखकर रोया / चीखा... प्रियतमा  !  युवती ने उत्तर दिया प्रियतम !  इसके बाद वे सदैव खुशहाल रहे  !  परम्परागत तुर्की संस्कृति में महिलाओं को हरम में रखा जाता था जहां दूसरे देशों से लाई गई गुलाम युवतियों के अतिरिक्त केवल पारिवारिक पुरुष ही प्रवेश कर सकते थे ! गुलाम युवतियां केवल अपने मालिकों के सामने पर्दा नहीं करतीं थीं , यहां स्त्री दासत्व के नियम दूसरे देशों की तुलना में कम कठोर थे ! सामान्यतः उनके साथ अच्छा व्यवहार किया जाता और सात सालों बाद मुक्त कर दिया जाता था !  ऐसे प्रकरणों में ज्यादातर तुर्की पुरुषों से ब्याह के दृष्टान्त अधिक हैं  !  तुर्की की आजादी और आधुनिकता के दौर में स्त्री दासत्व और हरम की व्यवस्था विलोपित हो चली है !


{ पिछली कथाओं में मित्रों का योगदान अदभुत रहा है सो इस भावानुवादित कथा की व्याख्या का भार भी उनके हवाले कर रहा हूं }

24 टिप्‍पणियां:

  1. दासी युवती बड़ी भाग्यशाली थी जो सात साल से पहले ही मुक्त हो गई . हालाँकि इसमें उसकी बुद्धि का कमाल भी है .
    लेकिन एक सवाल भी उठता है --इतनी बुद्धिमान युवती दासी कैसे बन गई !

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    1. क्या पारिवारिक कारण नहीं हो सकते ?

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  2. इस कहानी में कहीं दमित यौन आकांक्षा भी है क्या? जो बार बार खतरों से जूझने के लिए उस गुलाम औरत को उकसाती रहती है ...... ??

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    1. ये अनुमान तो आपको ही लगाना था क्योंकि मैंने तो कथा की व्याख्या मित्रों के हवाले कर दी है !

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  3. प्लानिंग कमीशन की चेयरपर्सन बनने लायक थी वो लड़की:)

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  4. इस कहानी से यह सीख मिलती है....

    बुद्धि और साहस हो तो चाहे कोई भी व्यवस्था हो नारी गुलामी से मुक्ति पा सकती है।

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  5. मूल कहानी में व्यापारी अपनी पत्नी के साथ गया था यहाँ व्यापारी की पत्नी का उल्लेख नहीं हैं इस लिये दासी और हरम शब्द से एक गलत सन्देश जाता हैं की शायद व्यापारी की दासी उसकी रखैल रही होगी
    हरम में दासियाँ , केवल हरम में रहने वाली अपनी रानियों की जैसे यहाँ व्यापारी की पत्नी की , सेवा करती थी और एक समय अवधि के बाद उनका विवाह वही किसी दास से किया जाता था .
    हरम में पुरुष वही आते थे जो परिवार के सदस्य होते थे और उन से पर्दा नहीं करती थी दासिया क्युकी पहली बात तो वो पुरुष इतने ऊँचे पायदान पर होते थे की वो दासी की तरफ देखेगे वो भी हरम में ये संभव ही नहीं था , वहाँ केवल पत्नी का राज्य था .
    दासी उस समय अभिभूत होती थी अगर क़ोई पुरुष उसको अपने कक्ष में बुलाता था { टर्की क्या , अपने यहाँ महाभारत में भी दासी का उल्लेख हैं } और { अनारकली - सलीम की मुगले आज़म } कौन भूल सकता हैं .
    इस दासी को बाहर की दुनिया देखनी थी , इस लिये वो इस प्रकार से बाहर गयी . बाहर जा कर उसने जिस पहले पुरुष को देखा उस पर वो रीझ गयी क्युकी उसकी वो दासी नहीं थी , उसके बाद बार बार उसने उस पुरुष का इम्तिहान लिया और देखा क्या वो उसके साथ जीवन बिता सकती हैं . फिर उसकी
    दूर दृष्टि थी की उसने अपने मालिक से इनाम में गुडिया मांगी जो केवल " हाँ हाँ " कहती हो , अपने जैसी , ताकि अगर पुरुष उसको ना चाहता हो तो वो गुडिया पर पहला प्रहार करे या अगर दासी ही बना कर रखना हो तो गुडिया को ही रख ले जो "हाँ हाँ " ही कहेगी { क्या रोबोट का विज्ञान तब भी था , क़ोई बताये शायद }
    मूल कथा में वो गुडिया खोखली बताई गयी हैं और उस पुरुष के घर में वो दासी उस गुडिया में लाल मीठा शर्बत भरती हैं .
    जब उस गुडिया पर वार करने के बाद उस शरबत को खून समझने के बाद वो पुरुष पी कर पश्चाताप करता हैं तो दासी को अपनी पसंद पर विश्वास हो जाता हैं और वो उस से विवाह कर के सुख से रहती हैं
    खोखली गुडिया बनवाने के भी कारण हो सकते हैं , अगर वो पुरुष ना खरीदे तो उस जगह "घर का समान , हीरे जेवर " इत्यादि भरे जा सकते हैं . { मेरी सोच मूल कथा में ऐसा कुछ नहीं हैं }
    हां मूल कथा में सबसे जरुरी बात दासी की खरीद के लिये किसी और मुल्क की लडकियां लायी जाती थी , यानी ह्युमन ट्रैफिकिंग तब भी थी , लडकियां दूसरे देश की ला कर उनको टर्की आदमियों से ब्याह दिया जाता था .
    कहानी में जैसे बेवकूफ उस रेस्तरा के मालिक को दिखाया हैं वैसे बेवकूफ - पैसे वालो के खवाब हर दासी / दासी की मानसिकता वाली स्त्री देखती हैं . सपनो के राजकुमार कभी गरीब या इंटेलिजेंट किसी कहानी में हो तो उसको भी पढवाए .
    "lived happily here after " is possible only when the husband has a lot of money and he is a little stupid and the wife has a slave mentality and the ability to make the best with a moneyfool

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  6. मूल कथा में पत्नी का उल्लेख है मैंने सोचा उसे निहित मान लिया जाएगा ! आपका सुझाव देखकर उसे फिलहाल वाक्य में उसे जोड़ रहा हूं ! दास दासियों के शोषण अंतहीन माने जा सकते हैं ! लड़की बुद्धिमान थी उसके दासी बनने में गरीबी या पारिवारिक कारण ज़रुर रहे होंगे ! रेस्तरां का स्वामी युवक पैसे वाला तो था ही और लड़की से कम बुद्धिमान भी !

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  7. लड़की बुद्धिमान थी उसके दासी बनने में गरीबी या पारिवारिक कारण ज़रुर रहे होंगे !

    not necessary
    Human trafficking is done with a intention of forced labor http://en.wikipedia.org/wiki/Human_trafficking
    many a times girls {from affluent families also} at toddler stage gets kidnapped and then they are put in a place under a matron who teaches them to become "pleasure objects" ,among those who are not suitable as pleasure objects they are sold for forced labor as maids { daasi } and this usually happens in country other then they belong to

    such kidnappings were also done to settle animosities

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    1. पारिवारिकता और गरीबी दो संभावनायें मात्र हैं इनके अलावा किसी भी अन्य कारण की उपस्थिति से इंकार नहीं ! आपके सुझाये कारण भी सही हो सकते हैं !

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  8. अली सा.
    वापसी पर आपके आशीर्वाद को हाज़िर हो गया हूँ..
    अमूमन आशिक मोहब्बत में जान देने की बात करते हैं.. कई मिसालें भी मौजूद हैं.. लेकिन बड़ा आसान है जान दे देना मोहब्बत में, मुश्किल है कोई ऐसा मिले जिसके लिए जान दी जा सके.. लिहाजा वो लड़की अच्छा इम्तिहान ले रही थी अपने आशिक का, जिसके मोहब्बत की गिरफ्त में वो पहले ही रोज से कैद थी!!
    व्याख्या वगैरह दीगर.. मैंने तो इस आख्यान को बहुत एन्जॉय किया.

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    1. सलिल जी ,
      कई दिनों से ये ख्याल बस ख्याल ही बना रहा कि आपका हाल चाल पूछ लूं , सो उसके लिए खेद ! सिर्फ एक बहाना कामकाज में मसरूफियात का ही कर रहा हूं !

      @ व्याख्या,
      बिल्कुल सही ! वह पहले दिन से ही बाहरी दुनिया की खोज / अपने लिए बेहतर की खोज में थी और उसने जिसे पाया उसकी टेस्टिंग बराबर की ! उसमें गज़ब का आत्म विश्वास था !

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  9. गुलाम होने के पारिवारिक या गरीबी के कारण अन्य कारण भी हो सकते है जैसा रचना जी ने कहा/लिखा !
    घनी नफरत में कही प्रेम छुपा है या फिर हत्या का अपराधबोध (रक्त/शरबत का मीठापन )
    विद्वता और साहस परिस्थितियों को अपने अनुकूल बना लेते हैं .
    कई बार एकता कपूर के दृढ नारी चरित्र इन लोक आख्यानों से निकले प्रतीत होते हैं :)

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  10. इस कथा का एक शीर्षक “The Arab Girl in Hate and Love” भी था :)

    लोक आख्यानों से निकले एकता कपूर के दृढ नारी चरित्र :)

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    1. The concept of soul / soulmate and marriage

      I read in a book that those who deeply harm each other in one life ie they hate each other then in next life they are supposed to get married to love each other
      the concept of universe itself is based on HATE AND LOVE :-)

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  11. पहले भी आया था जब टिप्पणियां एक या दो ही थीं. किसी और के कहे से कुछ निकाल कर परोस ने के लिए इंतज़ार किया. बात बनती नहीं दिख रही है. अब इतना ही लग रहा है कि व्यापारी के गैरहाजिरी का फायदा उठाते हुए उसने (दासी) जग देखने समझने की कोशिश की. शातिर थी सो अपने इरादों में सफल भी रही.

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    1. आप दूसरों की प्रतिक्रिया का इंतज़ार ना किया करें आपकी अपनी टिप्पणी ही चाहिये होती है :)

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    2. अरे भाई एक स्माइली लगाना भूल गया.

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    3. सर ,
      आपकी स्माइली हम वैसे ही जोड़ कर देखते हैं जैसे आपकी शुभकामनायें आपका आशीर्वाद !

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  12. दास युवती में पुरूष को पहचानने की गजब की कुवत थी। एकांत हरम में सेवा देने के उपरांत भी वह लोगों की मानसिकता को ठीक ठीक जांच परख सकती थी। वह किसी पुरूष को नहीं ठग रही थी बल्कि उसमें रही मोहांधता को परख रही थी। वह अच्छी तरह से जानती थी कि यदि यह सीमातीत नफरत करेगा तो ही वह प्रेमातुर हो प्रेम भी करेगा। उसे मोहासक्त करना भी आवश्यक था। रबड की गुडिया बनवाना उसके योजनाबद्ध होने का संकेत है। वह अच्छी तरह से जानती थी उस युवक की नफरत को चरम देकर उस नफरत को व्यक्त भी करवाना होगा, तभी वह पश्चाताप भी करेगा और चतुरता को स्वीकार भी करेगा, मोहासक्त समर्पण भी करेगा। परिणामों के प्रति युवती को पूरा व सटीक विश्वास था। पूरी घटना ही उसकी चतुर योजना का परिणाम प्रतीत होती है।

    कथा सार यह है कि पुरूष मूर्ख नहीं होता, मोहान्धता मूर्ख होती है।

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  13. बेशक युवती कुशल योजनाकार / रणनीतिकार थी !

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