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रविवार, 4 दिसंबर 2011

होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे ...


पिछले चार  दिनों से आंग्ल दैनिक समाचार पत्र  कर्नाटक राज्य के मंगलूर अंचल में संपन्न 'स्नान के अनुष्ठान' की ख़बरों से अटे पड़े हैं , हालाँकि हिन्दी दैनिक समाचार पत्र  इस विषय पर  लगभग मौन हैं और ब्लाग जगत भी ! सुना ये कि त्वचा संबंधी रोगों के भैषेजिक ईश्वरीय अनुग्रह के बदले में किया गया प्रतीकात्मक मानवीय व्यवहार  है  !  आंग्ल भाषी समाचार पत्रों  में छपी इस खबर के विषय में हमने अब तक कोई धारणा नहीं बनाई है  !  ना कोई आग्रह और ना ही पूर्वाग्रह  !  संभव है ब्लागर बंधु इस मुद्दे पर अधिक तथ्यगत जानकारी  दे सकें  ! उनका अभिमत जानने की इच्छा है  ! ख़बरों के हवाले से जो बिंदु उभर कर आये हैं वे इस तरह से है ...

(1)  यह एक परम्परागत वार्षिक आयोजन है , जिसमें दलित  / आदिवासी समुदाय के भक्तगण ईश्वर को धन्यवाद ज्ञापित करते हैं  !
(2)  ब्राम्हणों द्वारा केले के पत्तों पर खाना खा चुकने  के बाद जो अवशेष भोज्य पदार्थ आदि होते  है , दलित  भक्तगण उस सामग्री के ऊपर लुढकते हैं  !
(3)  इस अनुष्ठान को सत्ता का समर्थन प्राप्त है  !
(4)  इस अनुष्ठान पर सवाल खड़े करने वाले दलित कार्यकर्ता को भक्तगणों द्वारा पीटा गया  !

दि  हिंदू  समाचार पत्र  दिनांक 1.12.11 से  साभार  

जैसा कि हमने निवेदन किया कि  इस मुद्दे पर अब तक कोई राय कायम नहीं की है अतः मित्रों का अभिमत हमारे लिए अनमोल होगा !