पिछले चार दिनों से आंग्ल दैनिक समाचार पत्र कर्नाटक राज्य के मंगलूर अंचल में संपन्न 'स्नान के अनुष्ठान' की ख़बरों से अटे पड़े हैं , हालाँकि हिन्दी दैनिक समाचार पत्र इस विषय पर लगभग मौन हैं और ब्लाग जगत भी ! सुना ये कि त्वचा संबंधी रोगों के भैषेजिक ईश्वरीय अनुग्रह के बदले में किया गया प्रतीकात्मक मानवीय व्यवहार है ! आंग्ल भाषी समाचार पत्रों में छपी इस खबर के विषय में हमने अब तक कोई धारणा नहीं बनाई है ! ना कोई आग्रह और ना ही पूर्वाग्रह ! संभव है ब्लागर बंधु इस मुद्दे पर अधिक तथ्यगत जानकारी दे सकें ! उनका अभिमत जानने की इच्छा है ! ख़बरों के हवाले से जो बिंदु उभर कर आये हैं वे इस तरह से है ...
(1) यह एक परम्परागत वार्षिक आयोजन है , जिसमें दलित / आदिवासी समुदाय के भक्तगण ईश्वर को धन्यवाद ज्ञापित करते हैं !
(2) ब्राम्हणों द्वारा केले के पत्तों पर खाना खा चुकने के बाद जो अवशेष भोज्य पदार्थ आदि होते है , दलित भक्तगण उस सामग्री के ऊपर लुढकते हैं !
(3) इस अनुष्ठान को सत्ता का समर्थन प्राप्त है !
(4) इस अनुष्ठान पर सवाल खड़े करने वाले दलित कार्यकर्ता को भक्तगणों द्वारा पीटा गया !
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| दि हिंदू समाचार पत्र दिनांक 1.12.11 से साभार |
जैसा कि हमने निवेदन किया कि इस मुद्दे पर अब तक कोई राय कायम नहीं की है अतः मित्रों का अभिमत हमारे लिए अनमोल होगा !
