रविवार, 31 दिसंबर 2017

दुःख


एक बूढ़े व्यक्ति ने, रेन्डियर के शिकार के समय, अपना इकलौता पुत्र खो दिया था ! घर वापस लौटने के बाद, वो अक्सर अपने पुत्र की कब्र देखने जाया करता ! एक दिन संकरी खाड़ी में नाव चलाते हुए, उसने देखा कि कोई परदेसी व्यक्ति, धुंध को नाव की तरह इस्तेमाल करते हुए, पानी में आगे बढ़ रहा था, जबकि उस आगंतुक के पास कोई वास्तविक नाव नहीं थी ! कुछ देर तक नाराज़गी भरे शब्दों का इस्तेमाल करने के बाद, बूढ़े ने, उस व्यक्ति को मार डाला ! कुछ दिन के बाद फिर से, अपने पुत्र की कब्र की ओर जाते हुए बूढ़े ने, परदेसी व्यक्ति को देखा ! वो आश्चर्य चकित रह गया...हालांकि इस बार आगंतुक ने उस बूढ़े से पूछा कि, आपके दुःख का क्या कारण है ?  
      
उधर रखे पत्थरों की मनहूस ढेरी को हटा कर बूढ़े ने कहा, ये मेरे अनंत दुःख का एकमात्र कारण है ! बूढ़े का जबाब सुनकर उस अजनबी व्यक्ति ने कहा, आपकी तरह से मैं भी गहन अवसाद में हूँ, क्योंकि कुछ ही दिन पहले, सील के शिकार पर आये मेरे पुत्र को, किसी ने मार डाला था ! बूढ़ा समझ गया कि उसने, जिस व्यक्ति की हत्या की थी, वो इसी अपरिचित व्यक्ति का पुत्र रहा होगा, पिछले दिनों के घटनाक्रम को याद कर, बूढ़ा बेचैन हो गया और उसने, दिखावा करते हुए कहा कि, बहुत देर हो चुकी है जबकि उसका, ज़ल्दी घर लौटना, बेहद ज़रुरी है ! अपनी डोंगी को तेजी से खेते हुए बूढ़ा, घर लौटा और उसके बाद कभी भी अपने पुत्र की कब्र देखने वापस नहीं गया !

एस्किमों परम्पराओं में कही, सुनी गई इस संक्षिप्त जनश्रुति में, मनुष्य के दुःख को लेकर बेहद दार्शनिक और भावपूर्ण संकेत दिये गये हैं ! कथा कहती है कि एक इन्युइट बूढ़ा इसलिए शोकग्रस्त है, क्योंकि वो अपने जवान पुत्र को खो चुका है, इसमें कोई शक नहीं कि कथाकालीन समाज मूलतः आखेटक समाज है, ऐसे में नौजवान शिकारी पुत्र को खो देना, आखेटक आदिम जीवन की आर्थिकी में गंभीर आघात पहुंचने के जैसा है ! बर्फीले प्रदेशों में वानस्पतिक खाद्य पदार्थों की अनुपलब्धता के मद्देनज़र, सील अथवा रेन्डियर के शिकार के भरोसे हिमशीतित मृत्यु का प्रतिरोध करना और जीवित बने रहना एक कठिन और जोखिम भरा काम है ! उस बूढ़े ने वास्तव में दो अमूल्य वस्तुयें खोई थीं, एक भावनात्मक रूप से अपना नौजवान पुत्र और दूसरा उसकी पारिवारिक अर्थव्यवस्था का आधार स्तंभ !

भीषण मौसम में जीवित बने रहने के लिये आवश्यक है कि आखेट किया जाए और अच्छे आखेट के लिये अनिवार्य है एक समूह, खासकर युवा और दमखम वाले शिकारियों का समूह ! कहन मंतव्य यह है कि, अधिकतर मामलों में एकल शिकारी की तुलना में दलगत शिकार के परिणाम कहीं ज्यादा बेहतर होते हैं, इसलिए इन्युइट बूढ़े के दुःख को, जवान पुत्र की मृत्यु के साथ ही साथ, शिकारी समूह को हुई क्षति से भी जोड़कर देखा जाना ज्यादा उचित होगा ! आख्यान के अनुसार अवसादग्रस्त बूढ़ा अपने पुत्र की कब्र पर अक्सर जा पहुंचता है ! उसने डोंगी चलाते हुई देखा कि एक अपरिचित / परदेशी व्यक्ति धुंध की नाव पर सवार होकर जल भ्रमण कर रहा है ! हैरान कर देने वाले घटनाक्रम के तहत, आवेशित बूढ़ा, उस अपरिचित व्यक्ति को अपशब्द कहते हुए मार डालता है ! प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि, जैसे बूढ़ा व्यक्ति अपने पुत्र की मृत्यु के संभावित कारणों के विरुद्ध बलपूर्वक प्रतिकार / हिंसक प्रतिरोध कर रहा हो !

अगर हम आगंतुक की हत्या वाले घटनाक्रम को गौर से देखें तो पायेंगे, कि ये केवल पुत्र की मृत्यु को लेकर, आवेशित प्रतिरोध नहीं था बल्कि इस मुद्दे में भी, आदिम आर्थिकी का प्रश्न समाहित है ! पुत्र की मृत्यु से शिकारी दल को पहुंची क्षति / शिकारी समूह के टूट जाने के बाद, बूढ़ा एकमेव शिकारी, शेष रह गया था, यानि कि शिकार की सफलता की संभावनायें सिकुड़ गईं थी, ऐसे में किसी अपरिचित व्यक्ति / शिकारी के उस क्षेत्र में प्रवेश करने से शिकार में प्रतिद्वंदिता का संकट बढ़ गया होगा ! आदिम समुदायों की अपनी चिन्हित शिकारगाहों में बाह्य घुसपैठ, जीविका संसाधनों की घटती हुई संभावनाओं / खाद्य संकट का संकेत करती हैं ! इसलिए हमें ये स्वीकार करने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए कि उस बूढ़े ने, अपने युवा पुत्र / शिकार संबल को खोया था और उसे, अपरिचित व्यक्ति का आगमन, शिकार / खाद्य पदार्थों की उपलब्धता पर आसन्न संकट जैसा लगा होगा !

बूढ़े व्यक्ति की चिन्हित शिकारगाह पर अपरिचित व्यक्ति का आगमन / हस्तक्षेप / घुसपैठ, नि:संदेह आपातकालिक परिस्थितियों का संकेत है ! भयावह मौसम में खाद्य सामग्री की घटती मात्रा, आसन्न मृत्यु का संकेत / निश्चित हिमशीतित मृत्यु की घोषणा ! ऐसे में पुत्र की मृत्यु से क्षुब्ध बूढ़े ने आगंतुक व्यक्ति की हत्या, यकीनन दो कारणों से की होगी, प्रथम, पुत्र की मृत्यु का, संभावित, बदला और दूसरा, सामुदायिक परम्पराओं से चिन्हित शिकारगाह में अयाचित बाह्य हस्तक्षेप-जनित खाद्य न्यूनता की आशंकाओं का निवारण ! इस जनश्रुति का आख़िरी हिस्सा बेहद भावुक कर देने वाला है, बूढ़ा एक बार फिर से अपने पुत्र की कब्र को देखने जा पहुंचा है, जहां उसकी भेंट, उस अपरिचित व्यक्ति से होती है, जोकि अपने शिकारी पुत्र की मृत्यु के शोक में, वहाँ पर आया हुआ है, वो पुत्र, जो कुछ समय पूर्व, इसी जगह पर सील का शिकार करने आया हुआ था !

इन्युइट बूढ़े ने, रेन्डियर का शिकार करने वाले पुत्र को खोया था जबकि अपरिचित व्यक्ति ने सील का शिकारी पुत्र, दो नौजवान आखेटक, अपने शिकारी समूह / स्वजनों से बिछड़ गये थे ! इन्युइट बूढ़ा समझ गया था कि, अवसाद कैसे आते हैं ! वो, अपरिचित व्यक्ति के सामने से भागना चाहता था ! वो भागना चाहता था, अपने अपराध बोध से, और वो भागा भी, फिर कभी मुड़कर, अपने पुत्र की कब्र पर नहीं गया...