रविवार, 9 जुलाई 2017

तुलुगाक

आदिम समय, जब धरती पर केवल अन्धकार था, यहां तक कि आलोक की नन्हीं सी किरण भी नहीं, तब अलास्का के सुदूर समुद्र तट पर एक युवती अपने पिता के साथ रहती थी ! एक दिन वो पानी लाने के लिये अपने घर से बाहर निकली और जलीय अंतर्धारा के ऊपर जमी हुई बर्फ को खुरचने लगी, तभी उसने देखा कि अंतर्धारा में, एक पंख उसकी ओर बहता आ रहा था ! उसने अपना मुंह खोला तो वह पंख उसके मुंह में आ गया जिसे वह निगल गयी और...परिणाम ये हुआ कि वो उसी समय गर्भवती हो गई ! शिशु जन्म के लिये निर्धारित काल के उपरान्त उसने एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका मुंह काले कौव्वे की चोंच के जैसा था, शिशु की मुखाकृति को ध्यान में रखकर, शिशु का नाम तुलुगाक रखा गया !

युवती के समक्ष संकट यह था कि अन्धकार के कारण उसे अपने शिशु के लिये खिलौने ढूंढने में कठिनाई होती थी ! उन दिनों, घर की दीवार में लटकी हुई एक थैली, अक्सर हवा में लहराती रहती, जोकि तुलुगाक के आकर्षण का केन्द्र बन गयी थी ! थैली, पिता की थी, सो युवती उसे, तुलुगाक को नहीं देना चाहती थी, लेकिन तुलुगाक हमेशा थैली की ओर इशारा करके, उसे पाना चाहता था ! थैली को पाने के लिये वह क्रंदन करता रहता, अंततः थक हार कर युवती ने थैली तुलुगाक को सौंप दी, जिससे खेलते हुए तुलुगाक ने उस थैली को फाड़ दिया ! थैली के फटते ही आलोक की किरणे फूटीं ! कहते हैं कि तब ही से ये जग आलोकित हुआ, अब धरती पर अन्धकार के साथ आलोक भी था !

घर लौटने पर युवती के पिता ने अपनी पुत्री को फटकार लगाई कि उसने थैली उतार कर शिशु को क्यों दी ? पर अब तक देर चुकी थी और जग आलोकित होते ही तुलुगाक अंतर्ध्यान हो गया...!

इन्युइट आदिवासियों की ये लोक कथा धरती पर उजियारे के प्रकट होने का कथन, ईश्वरीयता के आवरण में लपेट, कर करती है ! आख्यान में पिता, पुत्री, हिमाच्छादित अलास्का, हिमनद, एक घर और उसकी दीवार पर लहराते थैले, निर्जन समुद्र तट और असीम अंधकार और काले कौव्वे रूपी तुलुगाक के अतिरिक्त अन्य किसी चरित्र अथवा मनुष्य की प्रारम्भिक उपस्थिति का उल्लेख नहीं किया गया है, कदाचित पुत्री, पिता की एकमात्र संतान अथवा एकमात्र जीवित संतान रही हो और पिता, विधुर हो गया हो ? क्या यह समय धरती पर किसी क्षुद्र ग्रह के टकराने, तद्जनित अन्धकार और धरती के हिमाच्छादित होने जाने का समय था ? अन्यथा कही गयी कथा, उक्त समय के अनुभव पर आधारित जैसी क्यों प्रतीत होती है ?

जमी हुई बर्फ के नीचे बहते हुए पानी का उल्लेख अस्वाभाविक नहीं है ! बर्फ को खुरच कर पानी का  जुगाड़ करती युवती अंतर्धारा में बहते हुए पंख को देखती है और उसे निगल भी लेती है, पंख रेवेन यानि कि काले कौव्वे का है जोकि आदिम और पाश्चात्य कथाओं में अधिप्राकृतिक शक्तियों के स्वामी के रूप में वर्णित है ! बहरहाल काले कौव्वे के पंख को निगल कर गर्भवती हो जाने का कथन यह संकेत देता है कि काला कौव्वा अंधकार में पहले से ही मौजूद आलोक को प्रकटित करने के लिये अवतरित हुआ और आलोक के प्रकट होते ही अंतर्ध्यान हो गया ! तुलुगाक का जन्म लक्ष्याधारित था अतः लक्ष्य  प्राप्ति के उपरान्त अंतर्ध्यान हो जाना, अन्य अवतार कथाओं, अवतारों और उनकी लीलाओं के जैसा है !  

पारलौकिक शक्तियों के धरती पर आने, अवतरित हो जाने के दृष्टान्तों में हम अक्सर युग्म के शारीरिक समागम को अनिवार्य नहीं मानते, सो छू लेने, देख लेने अथवा पंख के निगल लेने से युवती के गर्भवती हो जाने का कथन हमें आश्चर्य में नहीं डालता ! उल्लेखनीय यह कि कुंती और मरियम की तरह से इन्युइट युवती भी कुमारी / अविवाहित है जबकि कोई पारलौकिक शक्ति उसके गर्भवती होने का कारण बन जाती है ! बहरहाल इन तीनों प्रकरणों में चुनी गई युवतियों ने पुत्र / पुत्रों को ही जन्म दिया ! कहने का आशय ये कि पुरुष की सत्ता वाले समाजों में पुरुष के अवतार लेने के कथन बहुतायत से मिलते हैं ! अवतारी पुरुष शिशु काले कौव्वे ने काले अंधियारे समय में, अन्य पुरुष के स्वामित्व वाले थैले में बंदी उजियारे को मुक्त किया !