शनिवार, 3 अप्रैल 2010

गुमशुदगी के दिन ....2

मार्च १२,२०१० :

आज नये बच्चे परीक्षा देने आये हैं पर आदत पुरानी ...चपरासी मेरे पीछे जूट बैग लिये घूम रहा है और मैं कल जितना माल बटोर  चुका  हूं  लगता  है  जैसे लड़कों  की  कमर , मोज़े  वगैरह  वगैरह  नक़ल  के  अक्षयपात्र  हो गये हों  जितनी भी निकालो ख़त्म  ही  नहीं होती ! लड़कियां काफी खुश दिखती हैं क्योंकि मैं उनकी तलाशी की हिमाकत नहीं कर सकता...जानता हूं कि माल दोगुना हो सकता है पर कैसे ....
गर्मी  भीषणतम है  शायद  रायपुर के  जलवे  भी  इसके  सामने  फीके  हों ? बिजली सुबह से चार बार गोल हो चुकी है नतीजतन  तिवारी जी  बेहोश हो गये  और उन्हें  बमुश्किल पानी के छींटे मारकर होश में लाया गया फोन पर कहीं भी संपर्क की  गुंजायश  नहीं  है पर  सत्यम  होटल की  मिर्च अपना  असर दिखाने पर उतारू है....

मार्च १३,२०१० :

आज केवल  दोपहर की परीक्षा  और  कल  संडे  ... घर जाने का विचार हुआ पर १६ घंटे  की  यात्रा  नें  ख्याल  की भ्रूण हत्या में  देरी नहीं  की  !   रात  तक़रीबन  ८.३० बजे  घुप्प  अंधेरे  में  ध्वज स्तम्भ के ठीक  नीचे बैठकर गप मारने की व्यर्थ सी कोशिश  के दौरान  एक बड़ा  सा उल्लू स्तम्भ  के ठीक ऊपर आकर  बैठ गया  है ...मोबाइल से फोटो ले पाना असंभव है  ! टार्च  की रौशनी  डालने के बावजूद  वो  फ़ौरन उड़ा  भी  नहीं ...शायद वे  कई  हैं और  आस पास  के दरख्तों पर उनका बसेरा है  रात  भर उनके  घू घू  की  आवाजें  आती हैं  !  पता नहीं क्यों  उनका सानिध्य मुझे बुरा नहीं लगता क्योंकि मेरा उनसे पुराना वास्ता है ... आखिर  को  मैं  उच्च शिक्षा से  हूं ...सो  वे  भी ...गोया  हर  शाख  पर ....

मार्च १४,२०१० :

सुबह  सुबह  जंगल की  ओर...पास  कहीं चीतल  की आवाज  आ रही है ...रात चौकीदार नें बताया था कि आस पास भालू भी हैं  लिहाज़ा निवृत्ति  की त्वरा में उसकी दहशत काम कर गई  ! यहां जंगल और कालेज बिल्डिंग के दरम्यान एक छोटा सा मैदान  जैसे  सार्वजानिक निवृत्ति स्थल हो केवल अंधेरे और दूरी की परदेदारी है वर्ना ...आसमान और धरती के बीच खुलेपन  की कमीं नहीं !
उजाला होते ही टेसू के दरख्तों के दहकने का अहसास बढ़ता जाता है ...पास ही कुछ आम भी बौराये हुए हैं ...सो हम भी ...मोबाइल सेवायें ध्वस्त जो हैं  ! 

5 टिप्‍पणियां:

  1. इतना छोटा संस्मरण/फसाना - कहाँ से शुरू कहाँ से ख़त्म ?

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  2. पता नहीं क्यों उनका सानिध्य मुझे बुरा नहीं लगता क्योंकि मेरा उनसे पुराना वास्ता है ... आखिर को मैं उच्च शिक्षा से हूं ...सो वे भी ...गोया हर शाख पर ....
    ....बहुत खूब,प्रभावशाली व व्यंग्यात्मक अभिव्यक्ति!!!!

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  3. भईया आपके शब्‍दों के साथ-साथ अनुभव भी कर रहें हैं.

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  4. टेसू की फोटो तो ले लीजिए। आपको नहीं चाहिए तो मुझे हैडर के लिए दे दीजिएगा।
    और यह केवल लड़कों पर अत्याचार? गलत बात है। महिला अध्यापिका का प्रबन्ध होना चाहिए।
    घुघूती बासूती

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  5. टेसू की फोटो तो ले लीजिए। आपको नहीं चाहिए तो मुझे हैडर के लिए दे दीजिएगा।
    और यह केवल लड़कों पर अत्याचार? गलत बात है। महिला अध्यापिका का प्रबन्ध होना चाहिए।
    घुघूती बासूती

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