शनिवार, 14 नवंबर 2009

यहां शुक्र की मंगल से कोई होड़ नहीं है !

आज स्पंदन में 'शुक्र की मंगल से होड़' पढ़ रहा था जोकि ब्लागर मित्र के निज अनुभव को आधार बना कर लिखा गया है ! मुझे लग रहा है कि स्त्री पुरुष समानता को लेकर उन्हें 'अप्राकृतिक होड़' जैसा भ्रम हो रहा हैं ! मेरी प्रतिक्रिया कुछ लम्बी होने की वजह से , इसे वहां दर्ज कराने के बजाये पोस्ट में डाल रहा हूँ !

आदरणीया से सहमत हूँ कि ' देह निर्धारण ' प्रकृति प्रदत्त है , किन्तु चिंतन/विचार आदि का निर्धारण "सोशल कन्डीशनिंग" से होता है , अतः इसे प्रकृति प्रदत्त कहना अनुचित ही होगा ! कोई आश्चर्य नहीं कि उनके सुपुत्र नें कंसर्न प्रकट करते हुए 'कामवाली' सजेस्ट की , काम वाला नहीं ! मुझे नहीं लगता कि चिंतन /विचार को प्रकृति प्रदत्त बताने वाले कोई शोध किए गए होंगे या कहीं /कभी भी ऐसा सिद्ध पाया गया होगा ? सच कहूं तो समाज में स्त्री पुरुष की भूमिकाओं का निर्धारण भी प्राकृतिक नहीं है ! स्त्रियों को "नैसर्गिक रसोइया" मानने और ज्यादातर होटलों में "पुरुष शेफ" की मौजूदगी से इसे समझा जा सकता है कि यह प्रकृति प्रदत्त नहीं वरन समाज और परिस्थितयों द्वारा निर्धारित है ! देह रचना से स्त्री वीनस और पुरुष मंगल ही सही किन्तु स्त्री पुरुष समानता का कांसेप्ट देहों की समानता तो नहीं ही है ना ! और ना ही विचारों और चिंतन की एकरूपता को लेकर होहल्ला है !


जहां तक हम सभी समझते हैं कि स्त्री पुरूष समानता का मतलब "गरिमा/सम्मान/जीवन अवसरों/सुख समृद्धि " की समानता है ! बिना किसी लैंगिक भेद भाव के स्त्री पुरूष का साहचर्य !


भला मंगल और वीनस में उंच नीच /श्रेष्ठता और हीनता का भेदभाव करने की कोई वजह भी है ? दोनों के प्रकृति प्रदत्त भिन्न दैहिक गुणों के बावजूद सौर परिवार या हम लैंगिक आधार पर इन दोनों ग्रहों के दरम्यान "गरिमा /सम्मान "में कोई उंच नीच / कोई भेदभाव , की कल्पना भी करते हैं क्या ? यहां स्त्री की पुरूष से कोई होड़ नहीं है ! प्रश्न केवल 'गरिमा और जीवन अवसरों' की समानता का है !

मित्र के आलेख से यह भ्रम पैदा होता है कि जैसे स्त्री पुरूष समानता का मतलब है , दैहिक वैचारिक विभिन्नता की एकरूपता ! हम इस भ्रम से असहमत हैं हालाँकि उनके आलेख का मूल स्वर विभिन्नता के सहअस्तित्व की कामना करता है हमें यह बात जायज लगती है बशर्ते सहअस्तित्व की कामना 'समान गरिमा 'की शर्त के साथ हो !

1 टिप्पणी:

  1. एक दम सही बात. 16 आने सहमत.. और 4 पैसे अलग से...(ताकि शक की कोई गुंजाइश रहे ही नहीं)

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