सोमवार, 8 जून 2009

अली सिद्धू और माइंड सेट !

मैं काम में व्यस्त था , ख़बर आई कि सिद्धू साहब नें ज्वाइन किया है , घर जाने से पहले मिलकर जाइयेगा ! वो स्टाफ रूम में आपका इंतजार करेंगे ! मैंने कहा ठीक है ! तक़रीबन एक घंटे बाद काम से फुर्सत पाकर अपने नवागत साथी सरदार हरिंदरपाल सिंह सिद्धू से मिलने चल दिया ! वहां मौजूद साथियों नें कहा आपको आने में देर हो रही थी ! इसीलिये बस अभी अभी वो आपसे मिलने के लिए वहीं गये हैं जहां आप काम कर रहे थे ! मैं हैरान होकर वापस लौटा मगर वो वहां दिखे ही नहीं ! दोबारा स्टाफ रूम आया तो पता चला वो मुझे ढूंढते हुए आये और फ़िर से मेरे पीछे पीछे निकले हैं ? मैंने कहा रास्ते में कहीं दिखे ही नहीं ? खैर.. कोई बात नहीं स्टाफ रूम में ही इंतजार करता हूं !
सरदार जी मूलतः लुधियाना ,पंजाब के निकटवर्ती गाँव के मूल निवासी थे उनके पिता भिलाई स्टील प्लांट की लाइब्रेरी में असिस्टेंट लाइब्रेरियन थे ! सिद्धू साहब की पूरी शिक्षा छत्तीसगढ़ में हुई थी और वो अपनी ससुराल कैलिफोर्नियाँ में सैटिल होने की कोशिशों के दौरान अपने खांटी हिन्दोस्तानी दिल के हांथों मजबूर होकर छत्तीसगढ़ वापस लौटे थे ! ज़ाहिर है हम दोनों एक दूसरे से सर्वथा अपरिचित थे !
थोडी देर बाद दोस्तों नें कहा वो रहे , मैंने देखा ,सिद्धू नें भी सुन लिया था , सो उसने मुझे देखा और अब हम दोनों ज़ोर ज़ोर से हंस रहे थे , सोफे से नीचे घुटनों के बल ज़मीन पर बैठे हुए ! हंसते हंसते पेट में दर्द होने लगा था और हम दोनों कुछ क्षण तक निढाल सोफे पर जा गिरे ! फ़िर उसने कहा अली साहब मैं सफ़ेद दाढ़ी ढूढ़ रहा था और मैंने कहा ! मुझे दाढ़ी के साथ पगड़ी की तलाश थी ! हम फ़िर से हंस रहे थे ! खोज परख के दौरान हम दोनों नें एक दूसरे को देखा था पर पहचान नहीं सके , क्योंकि हमारे माइंड सेट में अली के साथ दाढ़ी और सिद्धू के साथ दाढ़ी सह पगड़ी के पहचान चिन्ह ( सिम्बल्स ) ठूंस ठूंस कर भरे हुए थे !
वर्षों बाद हम अब भी गहरे दोस्त हैं ठीक वैसे के वैसे जैसे कि पहली बार मिले थे , बिना किसी पहचान चिन्ह के !बल्कि हमारा दोस्ताना भाईचारे में बदल चुका है और अब वो किसी माइंड सेट द्वारा तय शुदा पहचान का मोहताज नहीं है !

3 टिप्‍पणियां:

  1. कई बार ऐसा हो जाता है कि हम एक चित्र सा खींच लेते हैं.

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  2. वाह, यह बढिया रहा। किन्तु वे सफ़ेद दाढी क्यों खोज रहे थे, केवल दाढी क्यों नहीं? वैसे मैं होती तो शायद आपसे ही पूछती कि अली साहब को देखा है क्या कहीं।
    घुघूती बासूती

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  3. घुघूती जी ,
    'बास' नें कहा अली साहब से मिल लेना , तो सिद्धू जी को लगा कि कोई बुजुर्गवार होंगे ?... उस वक़्त मैं बैचलर था और सिद्धू साहब फोर्स्ड बैचलर इसलिए वो मेरे ही साथ रहने लगे कुछ दिन बाद श्रीमती सिद्धू उनका एक साल का बेटा और सिद्धू साहब के पैरेंट्स घूमने / हाल चाल और हालात देखने जगदलपुर आये ! उनकी छोटी बहन सुबह सुबह गिलास भरकर चाय दे देती , मेरी आदत नहीं थी ! मैंने पूछा 'कट' चाय (आधी) क्यों नहीं देतीं ! उसने कहा भैया चाय का स्वाद आना शुरू होते ही चाय ख़त्म ना हो जाये इसलिए !
    जगदलपुर में पहले ही दिन मिसेज सिद्धू नें अमेरिकन लहजे में बच्चे का नाम 'हरप्रीत' बताया ! मेरे भोपाली पडोसी दुर्रानी साहब बहुत परेशान ! कान में फुसफुसा कर बोले , अली भाई , इतना खूबसूरत बच्चा है , इन सिद्धुओँ को कोई और नाम नहीं मिला ???......'हार्पिक'......?
    भला ये भी कोई नाम हुआ ?

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