शनिवार, 3 जनवरी 2009

ये समय क्या है......?

बहुत दिनों से ज़ेहन में ये ख्याल आ रहा है कि , अन्तरिक्ष की सीमायें ? उसका जन्म ? ब्रम्हांडों की संख्या ? ग्रहों /उपग्रहों /ग्रहिकाओं /पिंडों /धूमकेतुओं की संख्या ? डार्क मैटर ? और ब्रम्हांडों में मनुष्य जैसे जीवन की उपलब्द्धता ?
सब कुछ कितना "अनिश्चित" है ?
लेकिन इन तमाम अनिश्चितताओं के दरम्यान ग्रहों /उपग्रहों / ब्रम्हांडों वगैरह वगैरह का जीवन , उनका परिपथ ,उनके परिवार , उनकी गति , उनके जीवन मरण का समय किस कदर "सुनिश्चित" है !
सच कहें तो "अनन्त अनिश्चितताओं" में "गिनी चुनी निश्चितताओं" की पहचान का मूल आधार केवल और केवल "समय " है !
किंतु ये समय क्या है.......?

1 टिप्पणी:

  1. समय अन्तराल में अपनी उपस्थिति बताता है .हम उसकी जेब में रखी एक पुड़िया हैं . समय विराट स्वरुप है. इसमे सब अभिव्यक्त हैं . हमें समय को समझने के लिए , पहले उसे स्वीकारना है . फ़िर वो समझ में आ जाएगा .

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