शनिवार, 23 जून 2012

तितलियां 1

एक लड़की जिसका , नाम झू येंगताई था , घर में सब उसे प्यार से ज्यू मेई भी कहते ! उसकी हार्दिक इच्छा थी कि वो हांगजोऊ में जाकर अध्ययन करे ! उसके पिता चाहकर भी उसकी इच्छा के सामने प्रतिरोध नहीं कर सके , किन्तु उन्होंने शर्त रखी कि झू येंगताई वहां पुरुष वेश में जायेगी और पुरुषों की तरह से रहेगी तथा उसके साथ एक युवा सेविका भी भेजी जायेगी ! रास्ते में उन्हें एक युवा शिक्षार्थी लियांग शानबो मिला जो स्वयं भी हांगजोऊ में अध्ययन करने जा रहा था , वो क्वाईजी से आया था ! उन्होंने एक दूसरे के साथ अत्यन्त प्रसन्नतापूर्वक बातचीत की और तय किया कि अब वे भाइयों की तरह से रहेंगे ! इसके बाद उन्होंने तीन वर्षों तक वानसांग के स्कूल में अध्ययन किया ! सहपाठी बने रहने के वर्षों में लियांग शानबो को पता नहीं था कि उसका कथित सहपाठी युवा भाई , वास्तव में एक लड़की है ! 

एक दिन झू येंगताई के पिता ने उसे यथाशीघ्र घर वापस लौटने का सन्देश दिया ! झू येंगताई अब तक लियांग शानबो से गहन प्रेम करने लगी थी किन्तु उसमें सीधे सीधे अपना प्रेम प्रदर्शित करने का साहस नहीं था ! अतः उसने अपनी गुरु पत्नी को अपने प्रेम के संकेत बतौर एक पत्र सौंपा और याचना की , कि वे उसे लियांग शानबो को दे दें ! घर वापसी के रास्ते में उसने लियांग शानबो के लिए कई पहचान चिन्ह गिराये ! लियांग शानबो उसे विदाई देने आया ! अब तक उसे प्रेम के बारे में कुछ भी पता नहीं था किन्तु उसे झू येंगताई से अपने प्रेम का अहसास तब हुआ जब वे , फोनिक्स पहाड़ी पर पहुंचे और झू येंगताई ने उससे कहा कि मेरी युवा बहन ज्यू मेई विवाह के योग्य हो गई है ! उसके लिए एक योग्य सहचर की आवश्यकता होगी , उसे पूरी उम्मीद है कि लियांग शानबो शीघ्रता से अपना विवाह प्रस्ताव लेकर उसके घर पहुंचेगा ! 

यही वह स्थान / समय था जहां लियांग शानबो यह समझ पाता है कि , उसका युवा सहपाठी वास्तव में एक लड़की है ! वह उससे मिलने उसके घर जाता है ,जहां झू येंगताई अपने श्रंगार कक्ष में उससे भेंट करके अपने प्रणय का इज़हार करती है ! दुर्भाग्यवश कुछ प्रहर के बाद लियांग शानबो को खबर मिलती है कि झू येंगताई के परिजनों ने उसकी शादी एक उच्चाधिकारी के पुत्र मा वेंकाई के साथ तय कर दी है ! वह इस खबर के सदमें से मर जाता है ! अपने जीते जी उसे पता ही नहीं चला कि झू येंगताई ने दृढ़ता पूर्वक इस ब्याह का विरोध किया है ! शोकाकुल झू येंगताई उसे अंतिम बार देखना चाहती है ! मा वेंकाई से उसके ब्याह के अवसर पर आये सारे मेहमान यह देख कर आश्चर्य चकित हो जाते हैं कि , उसने ब्याह के वस्त्रों के बजाये शोक वस्त्र पहने हुए हैं ! 

विदाई के समय , रास्ते में वह जिद करती है कि उसे लियांग शानबो की समाधि देखना है ! जब उसकी पालकी लियांग शानबो की समाधि के पास पहुंचती है , तो वो बेचारी फूट फूट कर रोने लगती है ! बस इसी क्षण बिजलियां कौंधती हैं , हवा तेज चलने लगती है और बारिश उन्मत्त हो उठती है ! बिजली की कड़क के साथ ही समाधि खुल / फट जाती है , जिसमें झू येंगताई कूद कर समा जाती है ! इसके बाद बारिश , हवा और बिजलियों का कहर स्वतः बंद हो जाता है ! सूर्य पुनः चमकने लगता है , सब कुछ शांत हो जाता है ! तभी दो तितलियां समाधि से बाहर निकल कर आकाश में विचरने लगती हैं और ऐसा लगता है कि जैसे वे नृत्य कर रही हों ! 

यह लोक आख्यान चीन के पूर्वी क्षेत्र में स्थित हांगजोऊ के निकटवर्ती इलाके का है ! एशियाई देशों में चीन भी भारत की तरह से कृषि प्रधान देश है , एक खेतिहर समाज है ! चूंकि कथा का समय जिन राजवंश युगीन है , सो कहा जा सकता है कि , यह समय राज परिवारों और उनके अधिकारियों की प्रधानता का समय है ! संभव है , झू येंगताई के पिता ने अपनी पुत्री के लिए स्वेच्छा से अधिकारी पुत्र को वर के रूप में चयनित किया हो ? वे पुत्री का भविष्य , तत्कालीन व्यवस्था के अभिजात्य वर्ग के साथ सुरक्षित देख पा रहे हों ? या फिर ये भी संभव है कि मा वेंकाई से ब्याह करने की उनकी पुत्री की अनिच्छा का सम्मान वे इसलिये ना कर पाये हों , क्योंकि उन पर कुलीन वर्ग का दबाब रहा हो ?  

यह कथा इस बारे में कोई स्पष्ट कथन नहीं करती , किन्तु झू येंगताई को अध्ययन संस्थान से तत्काल वापस बुलाया जाना , उसकी असहमति के बावजूद , शोक वस्त्रों में ही उसका ब्याह कर दिया जाना , पितृ पक्ष की अहमन्यता अथवा विवशता के आगे , झू येंगताई की इच्छा के दमन को सत्य सिद्ध अवश्य करता है ! हालांकि यहां यह तथ्य गौर तलब है कि पिता , झू येंगताई की अपने गृहनगर से बाहर , हांगजोऊ जाकर अध्ययन करने की इच्छा का सम्मान , सशर्त ही सही , पर करते तो हैं ही ! अतः विवाह सम्बंध जनित , झू येंगताई के दुःख का सारा ठीकरा उसके पिता के सिर पर फोड़ना उचित प्रतीत नहीं होता !

कथा में उद्धृत समाज , मूलतः पुरुष प्रधान तथा राजतन्त्र युगीन समाज है , ऐसे समय में लड़की की अध्ययनोत्सुकता का संकेत और परिजनों द्वारा पुरुष वेशभूषा की शर्त के साथ इसकी सहमति प्रदान कर दी जाना , खास मायने रखती है ! लियांग शानबो को समझने तथा उसके प्रति आकर्षित होने के लिए , एक साथ अध्ययन के तीन वर्ष , झू येंगताई के लिए पर्याप्त रहे होंगे , इस दौरान लियांग शानबो उसके स्त्री रूप से भले ही अपरिचित था किन्तु वह तो स्वयं से अपरिचित नहीं थी ! कह नहीं सकते कि यह स्त्री सुलभ लज्जा के कारण हुआ  अथवा पुरुष वेश में बने रहने का दबाब ? जो वह समय रहते अपने प्रेम का प्रदर्शन लियांग शानबो से नहीं कर पाई ! जब उसके पास गृहनगर वापसी के सिवा कोई विकल्प शेष नहीं रहता तो , वो अपनी गुरु पत्नी को मध्यस्थ चुनती है ! वापसी के रास्ते में संकेत चिन्ह छोड़ती है ! 

वह लियांग शानबो को अपने घर , विवाह का प्रस्ताव लेकर आने के लिए प्रेरित तो करती है पर इसके लिए अपने ही घरेलू नाम ज्यू मेई का इस्तेमाल इस तरह से करती है कि जैसे वह अपनी युवा बहन के विवाह के लिए फ़िक्र मंद है और उसे लियांग शानबो इस योग्य दिखाई देता है ! ऐसा प्रतीत होता है कि घर वापसी के आकस्मिक निर्देश से वो अपने वैवाहिक भविष्य / प्रेम जीवन के प्रति आशंकित हो चली थी ! उसे लियांग शानबो से बिछड़ने का भय भी रहा होगा सो वो येन केन प्रकारेण संपर्क सूत्र जीवित बनाये रखने के सभी यत्न करती है ! उसका यही व्यवहार लियांग शानबो को उसके स्त्री रूप का संकेत देता है ! 

चूंकि वे तीन वर्षों तक साथ पढ़ रहे थे ! अतः उसके प्रति लियांग शानबो का मित्रवत / अनुराग , उसके स्त्री रूप के प्रति पुरुषोचित प्रेम का रूप लेने में देर नहीं करता , भले ही इसका प्राकट्य विधिवत रूप से , झू येंगताई के श्रृंगार कक्ष में हो पाया हो ! युवा जोड़े के पास संवाद के लिए समय कम था ! संवाद का रिक्त पक्ष / अन्धकार पक्ष , लियांग शानबो की मृत्यु का कारण बनता है ! समाज भले ही , मानव रूप में उनके प्रेम को बाधित करता है , किन्तु प्रकृति , झू येंगताई के दुःख से दु:खी है और वह प्रेमी युगल के मिलन का मार्ग प्रशस्त करती है ...कहने का आशय यह कि मानव समाज की तुलना में प्रकृति , सहज प्रेम की सबसे मज़बूत पक्षधर है  !

6 टिप्‍पणियां:

  1. यह कहानी फिर से यही रेखांकित करती है कि सच्चे प्यार को इस समाज में खुली पहचान के साथ कोई नहीं देखना चाहता.ऐसा कई ऐतिहासिक प्रेम-प्रसंगों में अपने यहाँ, मध्य-पूर्व में ,योरोप में,सब जगह हुआ है.

    ....लड़की को उसके घरवाले जब पुरुष वेश में ही अध्ययन के लिए बाहर जने देते हैं,उसी से पता चलता है कि लड़की बहुत दकियानूसी परिवेश में जी (?) रही थी !

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  2. मानव समाज की तुलना में प्रकृति , सहज प्रेम की सबसे मज़बूत पक्षधर है ॥

    कहानी बहुत अच्छी लगी ... सार्थक विवेचन

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  3. सहज प्रेम रेखांकित करती है यह कहानी

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