बुधवार, 28 दिसंबर 2011

शनि देव से डरे हुए मध्यमवर्गीय लोग...


जिन्हें ज्योतिष पर विश्वास ना हो वे कृपया इस पोस्ट से अपने तर्क विज्ञान को दूर रखें यह खालिस आस्था का मामला है , इसलिए कोई नुक्ताचीनी बर्दाश्त नहीं की जायेगी !  पिछले शनिवार को डाक्टर दराल साहब अपनी कार में बैठ कर शनि देव के प्रतिनिधि को चन्दा दिए बगैर आगे बढ़ लिये , उन्हें शनि देव से भय ना था पर जो दोपहिया चालक थे , बाइक से लेकर साइकिल सवार तक , उन्होंने टोल टैक्स पटाने के बाद ही रवानगी ली !  ये अदभुत संयोग है कि  दराल साहब ने शनि देव को इग्नोर किया जबकि अन्य मध्यमवर्गीय लोगों ने ऐसा करने का साहस नहीं किया ! इसका कारण बहुत साफ़ है कि शनि देव इंजीनियर्स , वैज्ञानिकों और मजदूरों के प्रतिनिधि तो है पर डाक्टरों के नहीं  ! कहने का मतलब ये है कि आजकल इंजीनियर्स और न्यायविद ,वैज्ञानिक ,सरकारी मोहकमात में नौकरी के भरोसे जीते हैं सो वे भी मुलाजिम यानि कि मजदूर ही हुए जबकि डाक्टर मुलाजिम हों...तो भी किसी की मजाल है जो उनसे प्राइवेट प्रेक्टिस करने , निजी नर्सिंग होम चलाने का हक़ छीन ले...जो डाक्टर सरकार ( सच्ची बात ममता बनर्जी और अशोक गहलोत जी के दिल से पूछो ) से नहीं डरते वो शनि देव से क्योंकर डरेंगे और शनि देव उनका कर भी क्या लेंगे आखिर को उनके अपने निकटजन भी तो देर सबेर इलाज के लिए डाक्टरों की ही शरण में आने वाले हैं  !

खैर यह पोस्ट डाक्टरों को छोड़ कर उन तमाम लोगों के लिए लिखी गई है जो अपने आप को मजदूर मानकर शनि देव का सम्मान करते हों ! इन लोगों में वे लोग भी शामिल है जो मेहनत तो बहुत करते हैं पर उन्हें इसका ठीक ठाक सिला नहीं मिलता ! मसलन ब्लागर्स , जिनके घर वालों को लगता है कि इनके बिना ब्लागजगत का पत्ता भी नहीं हिलता जबकि दूसरे ब्लागर्स को लगता है कि 'ये' यहां पर है ही क्यों  ?  कौन सा क़हर टूट पड़ता जो अगर यह रचना धर्म ना भी निबाह रहे होते और विश्वास कीजिये सारे ब्लागर्स एक दूसरे की बारे में ऐसे ही नेक ख्याल रखते हैं...कि ये यहां पर है ही क्यों...बकौल दराल साहब वो बंदा पिछले के पहले वाले शनिवार तक काले कपड़ों में टिप्पणियों की याचना करता था और अबकी सफेद पोश...जाओ नहीं देते चन्दा  !  डोंगे में नीबू मिर्च और तेल भला यह भी कोई रचना हुई !  मजा ये कि उन्होंने खुद ही इस माल से एक अदद रचना का जुगाड़ कर लिया !  सो हे मध्यमवर्गीय ब्लागर मित्रों उन मित्रों से प्रेरणा लीजिये जो शनि देव से डरते भी नहीं है और उनके आइटम्स की दम पे रचना पैदा करने का कोई मौक़ा नहीं खोते !

मित्रो आपको ज़रा भी अंदाज नहीं है कि शनि देव आपके जीवन के हर पक्ष के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं ! ज्योतिष के जानकार कहते हैं कि एक साढ़े साती और दो ढैय्या पर मामला समाप्त  हो जाता है , लेकिन यह सही नहीं है , आपको बचे हुए नौ भावों की नौ ढैय्या की चिंता भी करना पड़ेगी  ! उदाहरण के लिए संतति के भाव की ढैय्या ,पत्नी के भाव की ढैय्या , आय के भाव की ढैय्या , भाग्य के भाव की ढैय्या , मालिक के भाव की ढैय्या , यश की ढैय्या वगैरह वगैरह !  सो आप एक काम करें अगले शनिवार को सुबह छै से साढ़े सात बजे के बीच 'ॐ शनिश्चरायें नमः'  मन्त्र का जाप उतनी बार करें जितने दिन आपने पैदा होने के बाद धरती पर बोझ बनकर गुज़ार दिये हैं पर याद रहे कि बिना नहाये ये कार्य कदापि ना करें ,चूंकि आप नीलम जैसे महंगे और कीमती पत्थर अफोर्ड नहीं कर सकते इसलिए गुग्गुल की लकड़ी सफेद कपड़े के अंदर अपनी दाहिनी बांह में बांधें ,जैसे जैसे गुग्गुल की लकड़ी ( कृपया गोंद के धोखे में ना रहें गोंद वापरने से उपजा चिपचिपापन आपके अपनों के लिए कष्टदाई होगा इसलिए लकड़ी पर ही ध्यान दें ) आपकी त्वचा को स्पर्श करेगी गूगल पर आपका प्रभाव बढ़ता जाएगा !  इसके बाद आपकी रचना कोई पढ़े या ना पढ़े , टिप्पणियां आप पर बरसने लगेंगी ! 

यदि आप ब्लागिंग के रास्ते यश और धन की कामना नहीं करते तो रिटायरमेंट के बाद के लिए यह कार्य दूसरे की जेब से पैसा निकालने के काम आएगा ! आप खुद भी बेरोजगार नहीं रहेंगे और दूसरों को रोजी रोटी कमाने का पुण्य भी कर गुजरेंगे ! यदि आपको ज्योतिष सीखना हो तो सन 2021 के अक्टूबर माह में मुझसे व्यक्तिगत संपर्क करें संभवतः मैं उस महीने रिटायर होकर दूसरों का जीवन सार्थक करने के कार्य में लग गया होऊँगा !  इसके लिए आपको मुझे कोई फीस भी नहीं देनी पड़ेगी बशर्ते हाल फिलहाल में आप मेरी हक़ नाहक पोस्ट पर  टिप्पणियां बराबर दे रहे हों तो...और हां जो ब्लागर किसी ना किसी बहाने सम्मान बांटने का अनुभव रखते हों उन्हें विशेष रूप से ज्योतिष प्रशिक्षण के दौरान अमर्त्य ब्लागर सम्मान दिया जायेगा और मेरिट में दो फीसद अंक भी मुफ्त में ! प्रशिक्षण के उपरान्त उन्हें उनके सर्टीफिकेट लेमिनेट कराके दिए जायेंगे !  चर्चाकार ब्लागरों को यथाशक्ति गुग्गुल की लकड़ी मुफ्त में दी जायेगी ताकि वे शनि देव की कृपा लिंकित ब्लागरों तक अबाध गति से पहुंचाते रहें ! यहां यह स्पष्ट कर देना उचित होगा कि जिन ब्लागर्स ने किसी ब्लॉग सम्मेलन में हिस्सा ना लिया हो और अपने सम्पूर्ण ब्लागीय रचनाकाल में सतत असम्मानित बने रहे हों  , उन्हें ज्योतिष प्रशिक्षण की पूरी पूरी फीस भी चुकानी होगी ! 



( डाक्टर दराल से खेद सहित )

24 टिप्‍पणियां:

  1. टी.वी चैनलों की इसे नशे की लत अभी छूटी नहीं कि ब्लागरों को लगाने आ गए आप !
    :)

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  2. आना मेरी जान सैटरडे के सैटरडे.
    ''ये यहां पर है ही क्यों'' ऐसे मूलभूत सवाल न उठाया करें, जिससे श्‍मशान वैराग्‍य होने लगे.

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  3. तो शनि देव का प्रकोप ब्लॉगिंग तक भी आ गया....!

    डॉक्टर दराल साब शनि देव की अहैतुक कृपा के आकांक्षी नहीं हैं,वह कृपा उन्हीं को चाहिए जिन्हें ऊपर वाले ने किसी भी हुनर से महरूम किया हुआ है !

    ...हमारे सामने ऐसे लोग जब आते हैं तो हम कह देते हैं कि 'हम से बड़ा भी कोई सनीचर है क्या?'

    वैसे आपने टीप पाने का अच्छा नुस्खा बताया है,यह कम से कम टंकी पर चढ़ने से कम पीड़ादायक होगा !

    आपके अवकाश लेने के इंतज़ार में !

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  4. आते ही शनि का प्रकोप !

    पूरी फीस भरनी पड़ेगी ...जो ....:-(

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  5. @ काजल भाई ,
    लगे हुओं को क्या लगाऊंगा मैं भला :)

    @ राहुल सिंह जी ,
    उम्र के ख्याल से ,आप और मैं तो उसी ओर पथिक हैं ना :)

    @ संतोष जी ,
    अच्छा हुआ बता दिया आगे चलकर हम भी यही कहा करेंगे संतोष जी से बड़ा सनीचर कौन :)

    @ प्रवीण त्रिवेदी जी ,
    अरे क्या अब तक आप को भी कोई सम्मान नहीं टिकाया गया :)

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  6. बहार हो कि खिज़ां मुस्कुराए जाते हैं,
    हयात हम तेरा एहसाँ उठाए जाते हैं |
    सुलगती रेत हो बारिश हो या हवाएं हों,
    ये बच्चे फिर भ़ी घरौंदे बनाए जाते हैं |
    ये एहतमाम मुहब्बत है या कोई साज़िश,
    जो फूल राहों में मेरी बिछाए जाते हैं |
    समझ सको तो हैं काफी ये आँख में आंसू,
    के दिल के ज़ख्म किसे कब दिखाए जाते हैं |
    कोई भ़ी लम्हा क़यामत से कम नहीं फिर भ़ी,
    तुम्हारे सामने हम मुस्कुराए जाते हैं |

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  7. शनिवार की पोस्ट पर सबसे ज्यादा टिप्पणी आती हैं :)

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  8. जय शनि देव !
    शनि भक्त खूब बने हो ....
    लगता है अली सय्यद को नहीं, किसी पंहुचे हुए फकीर को पढ़ रहा हूँ ...
    मैं २०१४ में रिटायर हो रहा हूँ गुरु ...जरा ज्ञान दिए रहना ...
    लगता है धंधा अच्छा चलेगा !
    जय शनि देव !!

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  9. कहते हैं --डॉक्टर और वकील से भगवान बचाए --हालाँकि डॉक्टर को वकील से तो भगवान भी नहीं बचा पाता । :)

    यह पोस्ट डाक्टरों को छोड़ कर उन तमाम लोगों के लिए लिखी गई है जो अपने आप को मजदूर मानकर शनि देव का सम्मान करते हों--चलिए हम इसे एक ब्लोगर की हैसियत से ही पढ़ लेते हैं ।

    पर याद रहे कि बिना नहाये ये कार्य कदापि ना करें ,चूंकि आप नीलम जैसे महंगे और कीमती पत्थर अफोर्ड नहीं कर सकते इसलिए गुग्गुल की लकड़ी सफेद कपड़े के अंदर अपनी दाहिनी बांह में बांधें-- इस पर तो एक घटना याद आ गई जिसपर एक पोस्ट ही लिखनी पड़ेगी ।

    फ़िलहाल तो इस मज़ेदार पोस्ट का आनंद ले रहे हैं । :)

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  10. @ डाक्टर अनवर जमाल साहब,
    :)

    @ सुनील कुमार जी ,
    इस शनिवार को देखते हैं :)

    @ सतीश भाई ,
    अरे...आप 2014 में 65 के हो जायेंगे :)

    इसमें कोई शक नहीं धंधा कि तो चकाचक ही है मूड बने तो बताइयेगा :)

    @ डाक्टर दराल साहब,
    वकील से तो वकील ही बचा सकता है :)
    आपकी पोस्ट का इंतज़ार रहेगा !

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  11. @ डाक्टरों को छोड़ कर ...

    ये तो वर्गभेद हो गया। फिर लोग आगे भी विभाजन करने लगेंगे: पीएचडी वाले? प्रक्टिसिंग? नॉन प्रैक्टिसिंग? स्वास्थ्य पर लिखने वाले? स्वस्थ विषयों पर लिखने वाले? इलाज करने वाले? बीमार रहने वाले?

    लगता है शनिदेव को आना ही पड़ेगा!

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  12. शनि महाराज से तो अपना दोस्ताना है. बहरहाल सन २०२१ का इंतज़ार हैं. न जाने हम कहाँ होंगे!

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  13. हर शनिवार एक वृद्ध तेल के डब्बे में शनिदेव लिए आता है , तेल अथवा पैसे दे देती हूँ , अब उनकी वृद्धावस्था को देखकर या शनिदेवता के डर से , जो भी समझे ...
    जिसने जीवन के कठिनतम उतार चढ़ाव देखे हों, मन की शांति के लिए किसी पर भी विश्वास कर लेता है , वह चाहे मेडिकल का विद्यार्थी ही क्यों ना हो , कई चिकित्सकों को गृह शांति के लिए पूजा पाठ , शनिदेव पूजन आदि करते देख चुकी हूँ !

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  14. बकोल माया कलेंडर २०१२ में सब ख़तम हैं और आप २०२१ की बात कर रहे हैं टाइप एर्रोर तो हो नहीं सकता आपकी पोस्ट हैं आफ्टर ऑल ।

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  15. मसलन ब्लागर्स , जिनके घर वालों को लगता है कि इनके बिना ब्लागजगत का पत्ता भी नहीं हिलता जबकि दूसरे ब्लागर्स को लगता है कि 'ये' यहां पर है ही क्यों ? कौन सा क़हर टूट पड़ता जो अगर यह रचना धर्म ना भी निबाह रहे होते और विश्वास कीजिये सारे ब्लागर्स एक दूसरे की बारे में ऐसे ही नेक ख्याल रखते हैं...कि ये यहां पर है ही क्यों...बकौल दराल साहब वो बंदा पिछले के पहले वाले शनिवार तक काले कपड़ों में टिप्पणियों की याचना करता था और अबकी सफेद पोश...जाओ नहीं देते चन्दा ! डोंगे में नीबू मिर्च और तेल भला यह भी कोई रचना हुई ! मजा ये कि उन्होंने खुद ही इस माल से एक अदद रचना का जुगाड़ कर लिया ! सो हे मध्यमवर्गीय ब्लागर मित्रों उन मित्रों से प्रेरणा लीजिये जो शनि देव से डरते भी नहीं है और उनके आइटम्स की दम पे रचना पैदा करने का कोई मौक़ा नहीं खोते !



    हा हा हा ई निबंध को प्रस्तावना के रूप में सहेजा जा रहा है , संविधान बाद में जोड लिया जाएगा । एकदम धोबियापाट धुलाई प्रोसीज़र फ़ालो किए हैं हा हा हा

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  16. @ स्मार्ट इन्डियन ,
    डाक्टर दराल साहब ने डाक्टरों को छोड़ कर वकीलों की चिंता करने का सुझाव दिया है :)

    @ आदरणीय सुब्रमनियन जी,
    ईश्वर से प्रार्थना आप शतायु हों ! बुजुर्गों का आशीष सतत वांछित !

    @ वाणी जी ,
    आप जो कह रही हैं वही सच है ,देश के मानस में इस विश्वास की जड़े बहुत गहरी हैं !
    पोस्ट में डाक्टर दराल का हवाला है सो मान लिया कि डाक्टर ऐसे भी होते हैं :)

    @ रचना जी ,
    सामान्यतः सामाजिक यथार्थ (हास्य सहित) स्थानीयता आधारित होते हैं जैसे मायावालों का अपना कैलेण्डर वैसे ही मेरा खुद का रिटायरमेंट :)

    @ अजय कुमार झा साहब ,
    :)
    बहुत बहुत शुक्रिया !

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  17. मूल तथ्य है कि इंसान अंदर से बहुत ही डरा हुआ है....और उसे शनि देवता..या नीबू मिर्ची जिसका भी सहारा लेना हो...लेने से नहीं हिचकता..
    और ब्लॉगर भी तो इंसान ही हैं..कभी काले तो कभी सफ़ेद कपड़ों में टिप्पणी याचना कर जाते हैं.

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  18. मध्य को तो हरदम डरना ही है। आक्रमण नीचे से भी हो सकता है, ऊपर से भी। आगे से भी, पीछे से भी। नेट में बैठना भी है..ब्लॉगिंग भी करनी है..कमेंट की भी इच्छा है जबकी नहीं जानता कि सब्जी भी लानी है बाजार से। आटा भी नहीं है घर में। राशन पानी भी खत्मी खत्मा है। उसे तो वह भी शनीचरी लग रही है जो टकटकियाये निहार रही है बाजू में ..मुआँ उठता क्यों नहीं ! वह क्या खाक फार्मूला बांटेगा वह तो बस गुग्गल की लकड़ी बांधे उसका असर देखेगा।
    ..जय गुरूदेव।

    वैसे इस पोस्ट में कमेंट जियादे आ रहे हैं जबकि पिछली पोस्ट इससे बढ़िया थी!

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  19. आपके ज्योतिष ज्ञान पर नतमस्तक....ये लाईने विशिष्ट हैं ...
    डोंगे में नीबू मिर्च और तेल भला यह भी कोई रचना हुई ! मजा ये कि उन्होंने खुद ही इस माल से एक अदद रचना का जुगाड़ कर लिया !

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  20. @ रश्मि जी ,
    इंसान डरा हुआ है ? पर किससे ? शायद अपने जैसों से तभी तो नीबू मिर्ची में सहारा ढूँढता है :)

    @ देवेन्द्र जी ,
    मध्य वालों को दुनिया भी अच्छी नज़रों से नहीं देखती :)
    आपका कमेन्ट बहुत खूबसूरत है !
    आपके कमेन्ट की अंतिम लाइन वाले निष्कर्ष पर कुर्बान !

    @ अरविन्द जी ,
    धन्यवाद :)

    @ प्रवीण शाह जी ,
    :)
    शुक्रिया !

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  21. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच-743:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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  22. शनि देव की लूट है लूटी जाए सो लूट ,खूब टिप्पणियाँ कूट .

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