सोमवार, 19 जनवरी 2009

खूबसूरती होती कहाँ है

हमारे दोस्त ,ऊंचे पूरे गोरे चिट्टे, लेकिन उनकी बेगम , नाटी कृष्णवर्णी अति घुंघराले केश की मालकिन ! खुदा खैर करे दोनों ने प्रेम विवाह किया है ! इसके उलट पति लंगूर और बेगम हूर के द्रष्टान्त भी हमने देखे हैं ! इतना ही नहीं कई दोस्तों की पसंद कुछ इस तरह से कि वे एक ही समय में अनेकों तरह की लड़कियों /महिलाओं से असीमित प्रेम करते पाए जाते हैं ! हमने "बोरिस बेकर" को नीग्रो लड़की और ओबामा की गौरवर्णी मां को केन्याई मर्द के प्रेम में पड़ते देखा है ! कहने का आशय ये है कि हमने मेल और बेमेल किस्म के जोड़ों को घरौंदे बनाते बिगाड़ते देखा है ! चूँकि कुदरत का कानून है कि विपरीत लिंगियों के बीच सहज आकर्षण के परिणामों से ही दुनिया का 'अमरत्व 'और उसकी 'निरंतरता' है ! तो सवाल ये है कि औरत मर्द के सहज और स्वाभाविक गठजोड़ के लिए उत्तरदाई 'खूबसूरती होती' कहाँ है !
वैसे यहाँ यह स्पष्ट करना जरूरी है कि हमारे लिए खूबसूरती केवल स्त्री पुरूष का विषय नहीं है बल्कि यह दुनिया के किसी भी प्राणी किसी भी भूभाग और किसी भी रूप में स्वयमेव अभिव्यक्त है ! कभी नीग्रोयड ओंठ ,कभी भेड़ के बालों से केश विन्यास ,कभी जापानी /चीनी आंखें ,कभी ऊंचे /छोटे कद ,कभी चमड़ी के श्वेत /श्याम/ कृष्ण वर्ण , कभी कंचन कामिनी ,कभी गज गामिनी वगैरह वगैरह ! अनगिनत बिन्दु और हर बार अलग अलग तरह से 'स्वीकृत' खूबसूरती ! यानि कि खूबसूरती को मान्य करने के मानदंडों को हर व्यक्ति और हर समाज में आप भिन्न भिन्न पायेंगे !
एक बच्चा, एक औरत , एक फूल , एक नदी , एक पहाड़ हमारे लिए खूबसूरत और दूसरे के लिए सामान्य या बदसूरत हो जाते हैं ! तो फ़िर सवाल वही कि आखिर खूबसूरती होती कहाँ है ! क्या खूबसूरती का सम्बन्ध काया (विशिष्ट अभिविन्यास )से है ? क्या खूबसूरती का सम्बन्ध रंगों से है ? क्या खूबसूरती किसी भूभाग की चेरी है ? क्या खूबसूरती किसी धर्म /जाति की बांदी है ? क्या खूबसूरती उम्र से वाबस्ता है ? क्या खूबसूरती किसी खान पान की मोहताज है ? क्या खूबसूरती सम्पन्नता / विपन्नता से है ? क्या खूबसूरती आवरण /नग्नता से है ?
सोचें और हमें भी बतायें ! हो सकता है कि हम ग़लत हों पर ना जाने क्यों हमें ऐसा लगता है कि खूबसूरती अभिव्यक्त किसी भी रूप में हो ,पर उसकी शुरुआत और अंत केवल और केवल 'मन' से है !

2 टिप्‍पणियां:

  1. खूबसूरती तो सिर्फ़ नज़र में होती है ..सामने वाले का व्यक्तितव सुंदर हो तो सुन्दरता उसकी हर बात में दिखाई देती है ..बाकी तो सोच सबकी अपनी अपनी ..कोई किस नजर से सुन्दरता के माप दंड तय करता है

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  2. अली डियर ,बहुत अच्छा विचार दिया है .उसका विस्तार भी प्रभावशाली है .===खूबसूरती तो सब्जेक्ट में ही होती है .लेकिन उसका पारखी तो जौहरी ही होता है .एक बात और ,समाज तय करता है यह .पहले यह सीमित था , तो हर समाज की अपनी पसंद थी .अब फैला हुआ समाज है .

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