मंगलवार, 26 मई 2026

इफ़िस

इएंथे बेहद खूबसूरत लड़की थी , उसे युवा इफ़िस से मुहब्बत हो गई और इसके बर-अक्स इफ़िस ने भी आकर्षक इएंथे की मुहब्बत में होश गवां दिए । इफ़िस के पिता लिगडस को उनके ब्याह से कोई ऐतराज नहीं था इसलिए उन्होंने फौरन से पेश्तर इस रिश्ते के लिए हामी भर दी ।  मगर दिक्कत यह थी कि , मुहब्बत के रिश्ते को ब्याह की हद तक तक ले जाने में इफ़िस को एक ज़ेहनी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा था । उसका ख्याल था कि ब्याह होते ही यह रिश्ता टूट जाएगा क्योंकि वो भले ही एक लड़के के तौर पर पाली गई थी पर उसका जन्म बतौर लड़की ही हुआ था और यह राज उसके पिता लिगडस को भी नहीं मालूम था । केवल उसकी मां टेलेथुसा और देवी आइसिस ही इस राज को जानते थे क्योंकि उन दोनों की वज़ह से ही इफ़िस युवापन तक जीवित रह पाई थी ।

हुआ यूं कि लिगडस और टेलेथुसा जिन दिनों ब्याह के बंधन में बंधे थे वो बेहद गरीब थे उन्हें संतान की चाहत तो थी पर वो जानते थे कि लड़की का जन्म, पालन पोषण, और अंततः दहेज की व्यवस्था उनकी आमदनी के दायरे में सिमट नहीं पाएगी इसलिए जैसे ही टेलेथुसा गर्भवती हुई , लिगडस साफ साफ कह दिया कि अगर संतान, लड़की हुई तो वो उसे जन्म लेते ही मार डालेगा, भले ही वो इस कलंकित और दुखदाई घटना के लिए खुद को आजीवन दोषी मानता रहे, यह सुनकर टेलेथुसा बहुत दुखी हुई मगर उसके सामने कोई विकल्प भी नहीं था । उसने प्रार्थना की, कि देवी देवता उसकी मदद करें, उसकी अजन्मी संतान को जन्म के बाद के संकट से बचाएं । उसी रात देवी आइसिस , उसके सपने मे आई और कन्या के जन्म के बाद कन्या की सुरक्षा का वचन उसे दिया ।

बहरहाल लड़की के जन्म के बाद देवी आइसिस ने , उसे लड़के की वेशभूषा में छुपाने में मदद की । ये घटनाक्रम लिगडस की समझ में नहीं आया । वो पुत्र जन्म से संतुष्ट था , उसने संतान का नाम इफ़िस रख दिया । उन दिनों ये नाम लड़की और लड़कों, दोनों के लिए इस्तेमाल हुआ करता था , तो इफ़िस , एक लड़के की तरह से पाली गई । हालांकि इफ़िस को यह मालूम था कि वो देवी आइसिस और अपनी मां की कृपा से जीवित है । अब आगे का किस्सा ये कि, उसे इएंथे से मुहब्बत हुई , जोकि बस होती ही है , उसे कथासार और अंदरूनी रहस्योद्घाटन से कोई लेना देना नहीं होता । इफ़िस, जिसे मुहब्बत हुई, उसे डर भी था , प्रियतमा के बिछड़ने का , अपनी जग-हंसाई का और फिर, देवी आइसिस ने पुनः हस्तक्षेप किया और इफ़िस को मूलतः लड़का ही बना दिया । देवी के आशीर्वाद से युवा जोड़े का ब्याह हुआ और दोनों  खुशी खुशी पति पत्नी की तरह से जीवन गुजार पाए ।

यह आख्यान , ग्रीक पौराणिक कथाओं का महत्वपूर्ण अंश है जिसमें, संयोगवश, अजाने ही ,  दो युवतियों के मध्य प्रेम पल्लवित हुआ । इफ़िस , क्रीट में रहने वाले निर्धनतम जोड़े लिगडस और टेलेथुसा की एकमेव संतान थी , उसके पिता ने विपन्नता के नाम पर , लड़की का जन्म होते ही , उसे मार डालने का संकल्प ले लिया था , वो पुत्र जन्म की कामना करता था । उसके संकल्प में दहेज का उल्लेख भी है कदाचित उस समाज में लड़की के पिता के सामने वर मूल्य चुकाने का संकट भी मौजूद रहा होगा । गर्भवती टेलेथुसा , अजन्मी संतान के भविष्य को लेकर चिंतित थी तो उसने सामान्य , असहाय स्त्रियों की तरह से देवी देवताओं के सामने गुहार लगाई । उसके आर्तनाद को देवी आइसिस ने सुना और उसकी मदद की , हालांकि यह मदद केवल वेशभूषा के स्तर पर बदलाव तक सीमित थी ।

कथासार यह कि इफ़िस का अस्तित्व, लड़कों की तरह के वस्त्र विन्यास पर निर्भर था और वो मूलतः स्त्री ही थी । पर प्रेम , वो तो गुणा भाग सह  पूर्व नियोजन से नहीं होता , बस हो ही जाता है । इफ़िस को भी हुआ । इएंथे को इफ़िस पसंद थी पर वो तो उसे लड़का ही मानकर ब्याह करना चाहती थी । पिता लिगडस भी इफ़िस को लड़का ही समझता था । लेकिन इफ़िस, उसकी मां और देवी आइसिस तो जानते ही थे कि सच क्या है ? कल्पना करें कि , अगर इएंथे को पहले से पता होता कि इफ़िस लड़की है और तब ये प्रेम पनपता तो इसे समलैंगिक प्रेम माना जाता जो तत्कालीन समाज में सहज स्वीकार्य था । पुरुष सह पुरुष , स्त्री सह स्त्री , किन्तु ये मिथक , पिता लिगडस की निर्धनताजन्य क्रूरता के चलते इस सत्य को छुपा कर आगे बढ़ता है । एक स्तब्ध कयामत के जैसा , संबंधों की टूटन की दिशा में ।

इफ़िस के सामने अतीत के झूठ की विरासत है , उसके सामने दु:ख और विरह का भयावह संकट है । उसका अतीत उसके आगत का हत्यारा होने ही वाला था कि मिथक एक बार फिर से पारलौकिकता से ओत प्रोत उपचार लेकर हाजिर होता है और इस बार ये उपचार काम चलाऊ तथा वैकल्पिक वस्त्र विन्यास परिवर्तन के जैसा नहीं था बल्कि स्थायी तौर पर लिंगान्तरण का उद्घोष करता है , एक सुसंगत यौन परिवर्तन ताकि युवा जोड़ा ब्याह करे और सांसारिक जीवन खुशी खुशी व्यतीत कर के । बहरहाल आख्यानकालीन समाज, देवी देवताओं के सांसारिक हस्तक्षेप, उनकी दयादृष्टि और अनुग्रह तथा इहलौकिक, पारलौकिक विश्वासों पर आधारित था, इसमे कोई संदेह नहीं...  


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