मंगलवार, 9 फ़रवरी 2010

रूम सर्विस...बदतमीज़...मैं तुम्हारी कनपटी स्याह कर दूं !

टीवी चैनल्स पर न्यूज़ देखी और लहू बोइलिंग पॉइंट पर पहुंच गया है ! पता नहीं इस बिजनेस एग्रीमेंट की कानूनी बारीकियां क्या रही होंगी ? और अगर किसी नुक्ते पर एग्रीमेंट का पालन नहीं किया गया हो तो क्या अगली सुबह न्यायिक कार्यवाही की संभावनाएं ख़त्म हो चुकी थीं ? ऐसा लगता तो नहीं ? पर सितारा टंके आलीशान होटल की रूम सर्विस , मीडिया के सामने बिपाशा बासु के शयनकक्ष के दरवाजे को देर रात पीटती नज़र आई ये बात मुझे बर्दाश्त नहीं हो रही है ! सबसे पहले यह साफ़ कर दूं कि मैं बिपाशा बासु को जानता तक नहीं ! उनका फैन भी नहीं ! मैंने उनकी कोई फिल्म भी नहीं देखी है ...लेकिन किसी महिला के आराम और उसकी प्रायवेसी में लगातार खलल डालती हुई स्थूलकाय रूम सर्विस क्या साबित करना चाहती थी ! यदि होटल में ठहरे किसी व्यक्ति नें रूम सर्विस को काल ही नहीं किया हो तो भी क्या रूम सर्विस लगातार दरवाजा पीटते हुए उस व्यक्ति को जागते रहने के लिए बाध्य करेगी ? मुझे पता नहीं कमरे में बंद एक अकेली महिला के साथ हुए इस व्यवहार पर राष्ट्रीय महिला आयोग का नज़रिया क्या होगा ? और कानून के जानकार इस मुद्दे पर क्या ओपिनियन रखते हैं ? परन्तु मुझे लगता है यह सामान्य शिष्टाचार तथा होटल व्यवसाय की मर्यादाओं का खुल्लमखुल्ला उल्लंघन है ! किसी सेलिब्रेटी महिला के साथ मीडियाई कैमरे के सामने यह सब घटता है तो देश के साधारण नागरिकों की दुर्दशा का अंदाज़ा सहज ही लगाया जा सकता है ! अब कौन जाने की इस घटना से कितने लोग आहत हुए होंगे और इसका कानूनी बदला क्या हो सकता है ? होगा भी कि मामला यूंही रफा दफा कर दिया जायेगा ! पर मैं अपना आपा खो रहा हूँ...मेरे परिजन हैरान हैं...उन्होंने मुझे गुस्से में कभी देखा ही नहीं...और चिल्लाते हुए भी कभी सुना ही नहीं पर मैं...मेरे शब्द बिखर रहे हैं...ध्वनि कर्कश हो रही है , मेरी मुट्ठियाँ अपने आप बंधती जा रही हैं ...रूम सर्विस ...बदतमीज़ जी करता है मैं तुम्हारी कनपटी स्याह कर दूं !

2 टिप्‍पणियां:

  1. मुझे तो यही नहीं पता कि ऐसा कुछ हुआ था। आपकी यह बात 'पता नहीं इस बिजनेस एग्रीमेंट की कानूनी बारीकियां क्या रही होंगी ? और अगर किसी नुक्ते पर एग्रीमेंट का पालन नहीं किया गया हो तो क्या अगली सुबह न्यायिक कार्यवाही की संभावनाएं ख़त्म हो चुकी थीं ?' सबकुछ कह देती है। रात को होटल में किसी का दरवाजा पीटना किसी भी तरह से सही नहीं हो सकता न बिपाशा के लिए और न ही होटल में ठहरे अन्य लोगों के लिए।
    घुघूती बासूती

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  2. भईया वाकया क्या है यह हम टीवी मे देख नही पाये है किंतु आपने जो लिखा है उससे उसकी गम्भीरता का अहसास हो रहा है.

    मै एक सितारा होटल का प्रबन्धक रहा हु और इस संवेदनशील मसले पर मेरा स्पष्ट मत रहा है कि मेहमान की निजता ही इस व्यवसाय का मूल है. जब तक मेहमान सन्दिग्ध ना हो या कोइ वैधनिक अडचन ना आ जावे मेहमान की निजता को भंग नही करना चाहिये.
    मेहमान चाहे तो येसे स्वागत गृहो या होटलो के अनुज्ञप्ति को शिकायत के द्वारा रद्द करा सकता है और अन्य वैधानिक उपचारो का सहारा ले सकता है.

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