सोमवार, 31 अगस्त 2009

आले जो

हमारे हिसाब से वो दोनों शराबी....कबाबी और घर फूंक तमाशा देखने वाले लोग हैं ! हमेशा...नशे में धुत्त...सड़क पर चिल्ला चिल्ला कर ...गाते हुए .....सामने से गुजर रहे राहगीरों के चेहरों को पहचान कर ...कुछ इस तरह की टिप्पणियां कर देते हैं कि ...शर्मिंदा होने के सिवा कोई चारा , बाक़ी नहीं रहता ...अभी परसों ही एक शरीफ पति की शादी के पूर्व की शराफ़त भरी जिन्दगी का बखान करने लग गए ...वो भी उसकी नई नवेली पत्नी के सामने ! ... फ़िर सुना रात गहराते ही , घर पर काफी हंगामा हुआ ... सुबह... पति महोदय का मुंह सूजा हुआ पाया गया ! ...लोग डरते तो हैं , पर सड़क पर तो निकलना ही पड़ता है और ...वहां इन दोनों दोस्तों की लम्बी जुबान ...के खतरे भी उठाना पड़ते हैं ! ...कुछ भाभियां तो आज भी नहीं समझ पाई की शादी की प्रथम रात्रि में पति महोदय प्रेमालाप करने के पूर्व ही इन लफंगे / शराबियों और उनकी आवारगी के किस्से क्यों सुना रहे थे ?... ये नसीहत क्यों दे रहे थे कि इनकी जुबान पर भरोसा मत करना कुछ भी ऊल जलूल बकते रहते हैं ! हम सभी जानते हैं कि इन दोनों की अखंड दोस्ती की शुरुआत शराबखोरी की समान आदत की वजह से हुई वर्ना जाति /धर्म /परिवार और.... ख्यालात भी एक जैसे कहाँ थे ? ...और सच तो ये है कि शराब पीना शुरू करने की वजह भी तो एक जैसी , कहाँ थी ?
आज सुबह सुबह सारे पड़ोसी चाय के नाम पर जुटे और धीरे धीरे स्व धर्म की गौरव गाथा का बखान करने में लग गये ! ....अब भला वो धर्म ही क्या जिसकी महानता का वर्णन दूसरे धर्म की लंगोट खींचने से शुरू ना हो ! लिहाजा मित्रों की बात आहिस्ता आहिस्ता बतंगड़ बनने लगी और मामला तर्क से परे देहानुकूल होने लगा ...इस दरम्यान किसी ने भी ख्याल नहीं किया कि शराबी दोस्त कब आए और कितनी देर से सबको सुनने की कोशिश कर रहे हैं ! इधर माहौल बेहद गर्म ...लगा जैसे सब खून खून हो जाएगा ! तभी वो दोनों हँसे ....उन्होंने सबको गौर से देखा और कुछ कहते कहते रुक से गये ...उन्हें देख कर सारा विवाद झाग सा बैठने लगा ......मानों सबकी सांसें अटक गई हों , कौन जाने क्या कहने वाले हैं .....उन्होंने सहमें हुए बच्चों को देखा ,....सहमी हुई स्त्रियों को देखा और ...थोडी देर पहले गर्मागर्म बहस पर लगे हुए मित्रों को देखा ....फुसफुसाए ....'जानवर' ! .....फ़िर एक दूसरे को देखा और कहा 'आले जो ' और पीने चल दिए ! गाते हुए ....जोर जोर से ...मैंने रखा है मुहब्बत अपने .....! बच्चे खुश हुए ...स्त्रियों के चेहरों से तनाव जाता रहा ! ...अब हमें अपने बारे में सोचना होगा कि होश में रहकर भी ...हम और वो ....कितना फर्क है !
स्पष्टीकरण : (1) 'आले जो ' यानि कि 'चलो चलें ' (2) इस आलेख का मकसद शराब खोरी की हिमायत करना बिल्कुल भी नहीं है ! (३) दुनिया में बच्चों और स्त्रियों से खूबसूरत कुछ भी नहीं ..उन्हें अपने तनावों से बदशक्ल न करें !

2 टिप्‍पणियां:

  1. इसी फ़र्क को बताने के लिये बच्चन साहब ने मधुशाला रच डाली.. उत्तम रचना..बधाई

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