शनिवार, 20 अक्तूबर 2018

पहली कूक

तब जबकि सर्वत्र, भ्रम / अराजकता व्याप्त थी, बेनू पक्षी इस, ना कुछ, के ऊपर उड़ा और फिर उसकी सतह पर जा उतरा, उसकी पहली कूक से चहुं-दिश व्यापित सन्नाटा टूटा ! इस प्रथम ध्वनि से तय होना था कि संसार में क्या होगा और क्या नहीं ! कहते हैं कि बेनू पक्षी, महाकाय नील बगुले जैसा दिखता है किन्तु उसके पंखों की रंगत अग्नि की लौ जैसी और उसका सिर मनुष्यों के जैसा है ! मान्यता यह भी है कि बेनू पक्षी, मिस्री सूर्य देवता का सहयोगी अथवा स्वयं सूर्य देव है, उसके सिर पर मुकुट यही आभास देता है ! वो स्वयं को प्रतिदिन उगते सूर्य की किरणों के साथ नवीनीकृत करता, यानि कि उसमें स्वयं को मृत और पुनर्जीवित करने का सामर्थ्य है, बेनू जोकि फीनिक्स का मिस्री प्रतिरूप है, जो राख होकर भी पुनर्जीवित हो जाता है...