माउई जो माओरी लोक आख्यानों का
महान नायक है । चाहता था कि मृत्यु इस धरती से सदा सर्वदा के लिए विलुप्त हो जाये और
माओरी लोग अमर बने रहें । उसने योजना बनाई कि अगर वो नश्वरता की देवी हिन-नुइ-ते-पो
के शरीर में चुपके से प्रवेश करे और मृत्यु की देवी के गर्भ द्वार से लेकर मुंह तक
की यात्रा निर्विवाद ढंग से पूर्ण करने के बाद जीवित बाहर निकल आए तो मृत्यु का
चक्र टूट जाएगा तथा सारे इंसान अमर हो जाएंगे । माउई अपने साथ छोटी जादुई चिड़ियाँ लेकर पाताल
लोक जा पहुंचा उस वक्त मृत्यु की देवी हिन-नुइ-ते-पो सो रही थी । उसने अपने कपड़े उतारे और चिड़ियों को सख्त लहजे
में सावधान करते हुए बोला कि मैं देवी के शरीर के भीतर जा रहा हूं और जब तक मैं उसके
मुंह के रास्ते से वापस बाहर नहीं आ जाता तब तक तुममे से कोई भी आवाज नहीं करेगा ,
अगर तुम लोगों की आवाज सुनकर देवी जाग गई
तो मैं उसके शरीर के अंदर ही मारा जाऊंगा ।
इसके बाद माउई ने हिन-नुइ-ते-पो के
पैरों की तरफ से सोती हुई देवी के शरीर में प्रवेश करना शुरू कर दिया । वो देवी के जिस्म में पूरी तरह से अंदर जा भी
नहीं पाया था कि उसकी पूंछ और उसके शरीर की अजीब-ओ-गरीब हरकत देखकर छोटी फैनटेल
चिड़िया जोर से हंस पड़ी । चिड़िया की हंसी
की आवाज सुनकर देवी हिन-नुइ-ते-पो जाग गई , उसने खतरे को भांप लिया था सो अपने
दोनों पैरों को जोर से भींच लिया, इसका परिणाम यह हुआ कि माउई , देवी के शरीर में ही फंस गया और देवी ने
उसे वहीं पर दबोच कर मार डाला । माउई की मृत्यु से इंसानों के अमरत्व की तमाम
उम्मीदें खत्म हो गईं और तबसे हरेक इंसान को किसी ना किसी दिन मरना ही पड़ता है । यदि
उस दिन माउई , देवी के शरीर से जीवित बाहर निकल पाया होता तो सारे के सारे इंसान
अमर हो गए होते पर नन्ही चिड़िया, माउई की चेतावनी को विस्मृत करके हंस पड़ी और फिर
जागृत हुई देवी ने बाजी ही पलट दी ।
यह कथा मनुष्यों में अमरत्व की
लालसा को समर्पित है वे मृत्यु नहीं चाहते । माओरी आख्यानों का बहुचर्चित नायक
माउई , उनकी इस लालसा से सहमत है और इसके लिए जतन करता है । उसकी योजना में
नश्वरता की देवी हिन-नुइ-ते-पो के जिस्म में मौजूद मृत्यु चक्र को बाधित करने की
है । वो देवी के संज्ञान में लाए बगैर देवी के गर्भ द्वार से लेकर मुख तक की
यात्रा निर्विवादित ढंग से पूरी करना चाहता है
। उसे ज्ञात है कि देवी हिन-नुइ-ते-पो जागृत अवस्था में ऐसा कभी नहीं होने
देगी क्योंकि अपने ही सगे पिता ताने-महूता की पत्नि हो जाने की ग्लानि से मुक्ति
के लिए उसने पाताल लोक का विकल्प स्वयं चुना था और माओरी कबीले के इंसानों के
अमरत्व को नश्वरता का अभिशाप दिया था । यहाँ यह तथ्य उल्लेखनीय है कि उसने नश्वरता
के लिए अभिशापित आत्माओं को मां जैसा स्नेह दिया किन्तु वो किसी भी कीमत पर अमरता
की पुनरबहाली नहीं चाहती थी । माउई की योजना की असफलता के खतरे अलग ही थे । ऐसे
में देवी हिन-नुइ-ते-पो की देह में मृत्यु चक्र तोड़ने के लिए घुसे माउई की मृत्यु
निश्चित थी ।
माउई, पाताल लोक में निद्रालीन देवी हिन-नुइ-ते-पो की देह यात्रा के सफल आयोजन से पूर्व अपने जीवन को सुरक्षित रखने के उपाय बतौर साथ में मौजूद नन्ही चिड़िया फैनटेल को शांत रहने की ताकीद करता है । वो चाहता है कि चिड़िया की हंसी , आवाज अथवा चहचहाहट से देवी कि निद्रा भंग ना हो जाये क्योंकि जागृत देवी उसे अपनी देह के अंदर ही दबोचकर मृत्यु दंड दे सकती थी । कुल मिलाकर माउई का जीवन , माओरी कबीले का अमरत्व , अंधकार लोक में सोई हुई देवी हिन-नुइ-ते-पो की नींद पर निर्भर था । उसने आगत संकट से निपटने और आयोजन की असफलता को टालने के लिए नन्ही चिड़िया को सावधान किया । बहरहाल कथा संकेत यह है कि पाताल लोक, देवी हिन-नुइ-ते-पो का था और नश्वरता उसका अभिशाप , इसलिए जादुई चिड़िया, हंसी अथवा चहचहाहट के अपने नैसर्गिक स्वभाव से विरत ना रह सकी । उसने वो किया जो माउई नहीं चाहता था । अंततोगत्वा अमरत्व के आकांक्षी की स्वयं की मृत्यु पर यह कथा समाप्त हो गई ।