एक बर्फीली और भीषण सर्द रात में , बेहद
हसीन युवती अकेले ही सफर कर थी । वो उस सराय में आकर ठहरी , जिसे एक बुजुर्गवार
दम्पत्ति चलाते थे । कहते हैं कि यह घटना यामागाटा प्रांत में घटी थी । युवती ने
अलाव से कुछ दूरी पर बैठकर बुजुर्ग दम्पत्ति के साथ खाना खाया लेकिन हैरानी की बात
यह हुई कि वो युवती खाना खाने के फौरन बाद , उठ खड़ी हुई और बाहर की भयंकर तूफ़ानी
रात की परवाह किए बगैर सराय से बाहर निकलने लगी । उसकी इस हरकत से हतप्रभ सराय
मालिकों ने उससे कहा कि वो बाहर ना जाए और उन्होंने उस लड़की का हाथ पकड़ कर उसे,
वापस सराय के अंदर खींच लिया । उन्हें बाहर के मौसम को लेकर उस युवती की फिक्र थी
। युवती का हाथ बेहद ठंडा था और उसे पकड़ते ही, बूढ़े सराय मालिकों के जिस्म की सारी
गर्मी खत्म हो गई । सराय के अंदर वापस आते ही युवती का पूरा जिस्म महीन बर्फीली
धुंध में बदल गया और वो चिमनी के रास्ते एक बार फिर से सराय से बाहर निकल गई ।
वृद्ध दम्पत्ति अत्यधिक हैरान थे कि ऐसा कैसे मुमकिन हुआ ?
तभी उन्हें याद आया कि बहुत पहले सराय में
ठहरे हुए एक व्यक्ति ने उन्हें इसी तरह का एक किस्सा बताया था । उसका दावा था कि
उसका ब्याह युकी ओना से हुआ था जो बला की खूबसूरत युवती थी । उसकी आंखें तीखी और
जिस्म संगमरमर की तरह से झक्क सफेद था । उस व्यक्ति को रात में गरम पानी से नहाना
पसंद था लेकिन युकी ओना को नहाने में कोई दिलचस्पी नहीं थी । वो हैरान था कि उसकी
पत्नी सर्द रात में गरम पानी से नहाना पसंद क्यों नहीं करती । उसने बताया कि एक
तूफ़ानी बर्फीली रात में उसने युकी ओना से जोर देकर कहा कि वो गरम पानी से नहा ले
वरना ठंड में जम कर मर जाएगी । युकी ओना ने प्रतिरोध में, बहुतेरी बहस की लेकिन
पति के आग्रह को मानने के सिवा उसके पास
अन्य कोई विकल्प शेष नहीं था । वो नहाने चली गई और जब उसे नहाते हुए काफी देर हो
गई तो उसके पति को उसकी फिक्र हुई उसने
झांक कर बाथरूम में देखा । वो हैरान था कि उसकी पत्नि वहां थी ही नहीं बल्कि बाथटब में आधे अधूरे पिघले हुए बर्फ के
टुकड़े मौजूद थे ।
यह आख्यान जापान की प्रांतीय विविधता के
कारणवश दो अलग अलग संस्करण में प्रचलित और बहुश्रुत आख्यान है । जबकि, वास्तविकता यह है कि कथा की नायिका युवती
और कथा में उल्लिखित घटनाक्रम नितांत काल्पनिक है । कथा का पहला संस्करण यामागाटा
प्रांत के बूढ़े दम्पत्ति की सराय से चिमनी के रास्ते बाहर निकल भागी खूबसूरत युवती
को संबोधित है । सराय के अंदर की सुरक्षा और सराय के बाहर के भयंकर बर्फानी तूफ़ानी
माहौल की तुलनात्मक फिक्रमंदी बुजुर्ग दम्पत्ति को युवती के जीवन के लिए आश्वस्त
होने के यत्न का कथन करती है । वो युवती को सराय से बाहर नहीं जाने देना चाहते और
युवती को पकड़ कर सराय के अंदर लाते हैं । युवती के जिस्म का ठंडापन और चिमनी के
रास्ते सराय से बाहर भाग जाने का कथन प्रतीकात्मक है जिसके तहत वर्णित युवती का
जिस्मानी ठंडापन, बुजुर्ग दम्पत्ति की दैहिक ऊष्मा को लगभग शून्य कर देता है और
सराय के अंदर आकर भी युवती का धुंध में बदल कर चिमनी के रास्ते बहिर्गमन कर जाना
बुजुर्ग दम्पत्ति का मतिभ्रम है ।
इंसानों के लिए सर्द मौसम में भयंकर ठंडेपन
की उपस्थिति की, मनः परिणति, कमोबेश वैसी ही है जैसे कि भीषण गर्मी में किसी
रेगिस्तान में फंसे इंसान की, मनः स्थिति की, कहने का आशय यह है कि असामान्य मौसम,
मनुष्य को मतिभ्रम में डालता है और उसकी कल्पनाशीलता वास्तविकता से इतर स्वप्न
संसार को रचने लगती है । दृष्टिभ्रम जनित ये संसार बेहद दिलचस्प भी हो सकता है
जैसे कि सराय वाली लड़की का सौन्दर्य, बूढ़ों की फिक्र, और लड़की का धुंध में बदलकर बहिर्गमन
कर जाना । कथा का दूसरा संस्करण जापान के निगाटा प्रांत के हवाले से कहा गया है
जिसमें एक पुरुष अतिशीत के चलते युकी ओना नाम के काल्पनिक चरित्र को गढ़ता है और
उसे अपनी पत्नि बतौर उद्धृत करता है जिसकी
देह- रंगत संगमरमर की तरह की और आंखें मदमस्त कर देने वाले नूर / आभा वाली । पुरुष
को देर रात गरम पानी से नहाने की आदत है क्योंकि वो अपने जिस्म को सामान्य तापमान
पर रखना चाहता है जबकि घर से बाहर का तापमान शून्य से साठ या सत्तर डिग्री कम हो
सकता है ।
वो अपनी पत्नी के लिए फिक्र मंद है और
उससे हर रात आग्रह करता है कि वो भी गरम पानी से नहाया करे किन्तु पत्नि उससे
निरंतर इंकार करती रहती है , यहाँ यह कह देना उचित है कि पति के लिए, पत्नि का साथ
बना रहना, मौसम की लंबाई जितने लंबे मतिभ्रम का पर्याय है । पति चाहता है कि उसकी सुंदर
पत्नि मौसम के विरुद्ध उतनी ही सुरक्षित बनी रहे जितना कि वो स्वयं है । उसके
आग्रह की निरन्तरता और सतत मनुहार के चलते युकी ओना रात में गरम पानी से नहाना स्वीकार
कर लेती है किन्तु वो नहाकर बाथरूम से बाहर नहीं निकलती । फिक्रमंद पति बाथरूम में
झाँकता है जहां युकी ओना है ही नहीं । युकी ओना यानि कि एक कल्पना संसार जो बाथटब
के गरम पानी में युवती की सम्पूर्ण सजीव देह के बदले बर्फ के छोटे छोटे टुकड़ों में
मौजूद रह गया है । अगर गौर से देखें तो कथा का पहला संस्करण युवती के स्वयं के
जैसे मौसम के साथ पलायन या एकरूप हो जाने जैसा है जबकि दूसरा संस्करण में युवती
गरम पानी जैसे विपरीत मौसम के साहचर्य में अपना अस्तित्व खो बैठती है ।
आख्यान के दूसरे संस्करण वाले पति यानि नौजवान की चिंता और पहले संस्करण वाले वृद्ध दम्पत्ति की चिंता, मनुष्य के अस्तित्व को बनाए रखने के उद्देश्य के तहत एक जैसी भले ही लगती हों पर इन दोनों चिंताओं में पीढ़ियों का फासला है । पति तुल्य अथवा पिता तुल्य, यानि इल्यूजन अथवा मतिभ्रम आयु भेद नहीं देखता वो केवल सामान्यता से असामान्यता वाली ऋतुओं को मनुष्य के चिंतन से जोड़ता है । वास्तविकता हो या दृष्टिभ्रम ।