शनिवार, 26 सितंबर 2026

नदी के जैसी

कहते हैं कि ओबा जोकि प्यार , वफादारी और स्वभिमान की देवी है वो अग्नि, विद्युत और प्रचंड पुरुष ऊर्जा के स्वामी शांगो की तीन पत्नियों में से एक है । उसके अतिरिक्त, ओया और ओशुन भी देवता शांगो की पत्नियाँ हैं । हालांकि तीनों पत्नियाँ शांगो से प्यार करती हैं और उसके प्रति पूर्णतः समर्पित हैं लेकिन ओबा, ओया और ओशुन की तुलना में कहीं अधिक निष्ठावान हैं । किन्तु देवता शांगो ओया की अग्नि और ओशुन की मिठास के प्रति ज्यादा आकर्षित है , वो ओबा की तरफ ध्यान नहीं देते । इसके बावजूद ओबा , शांगो के घर की देखभाल करती हैं और उसे इंतजार है कि कभी ना कभी शांगो उसकी तरफ भी ध्यान देंगे । एक दिन ओबा , ओशुन से पूछती है कि ऐसा कौन सा जादू है , जिसके वश में होकर शांगो , ओशुन से ज्यादा प्यार करते हैं ।

 

ओशुन के स्वभाव में मिठास के साथ ही चालाकी भी थी तो वो ओबा से झूठ बोल देती है कि उसने शांगो के मांसाहारी व्यंजन में अपना कान काटकर डाल दिया था , जिसे खाने के बाद से , वो उस पर फिदा हो गए हैं । इस बात पर ओबा , सहज ही विश्वास कर लेती है । वो , शांगो के खाने में अपना कान काटकर डाल देती है । लेकिन शांगो इस बात को लेकर ओबा से नाराज हो जाता है और उसे ठुकरा देता है । ओबा दु:खी और शर्मिंदा होकर आंसुओं की नदी बन जाती है। ओशुन की स्त्रियोचित डाह पर आधारित झूठ पर विश्वास करके ओबा ने अपना प्यार , अपना आत्मसम्मान खो दिया। प्यार पाने की कवायद में उसने अपना मौलिक वजूद खोया , एक जख्म खाया जो हमेशा उसके साथ रहा ।

 

बहरहाल खुद से हुए छल और जख्म की नसीहत ने ओबा को बदल डाला । अब वो अपने भक्तों को विश्वासघात से बचने की सलाह और जख्म के उपचार संबंधी सुझाव देती है , सहायता करती है । ओबा को उसकी प्रतिष्ठा और सामर्थ्य से कम मिला । उसने अपना बड़प्पन खोया । वो प्यार में मिले गहरे जख्म और गहरी सीख की देवी है । वो रिश्तों के लिए भावनात्मक मेहनत और वफादारी की देवी थी और झूठ पर विश्वास करके उथल पुथल भरी नदी जैसी देवी होकर रह गई है । यह मानने में कोई हर्ज नहीं कि ओबा और ओशुन का रिश्ता पत्नियों के दरम्यान बैरन होने जैसे भाव को अभिव्यक्त करता है । भले ही ओरिशा शांगो की तीनों पत्नियां ओरिशा / देवियाँ थीं पर उनके अस्तित्व में नश्वर प्राणियों के जैसी ईर्ष्या मौजूद थी ।

 

यह एक योरुबा लोक आख्यान है । जिसमें बहु देवतावाद पर विश्वास एक सामान्य बात है । ये  मिथक देवता को ओरिशा कहता है अस्तु कथा में उल्लिखित बहु-देवतावाद असल में बहु-ओरिशावाद माना जाएगा , जिसमें अलग अलग ओरिशा अलग अलग प्राकृतिक शक्तियों के मालिक हैं , यथा कोई विद्युत , कोई जंगल , कोई समुद्र, कोई बस्तियों आदि आदि के ओरिशा हैं । कहते हैं कि कुछ ओरिशा शांत और प्रेमिल स्वभाव के हैं और कुछ खतरनाक किस्म के । यह आख्यान स्वीकारता है कि इंसानों की तरह से देवता भी एकाधिक ब्याह करते हैं, जिसका परिणाम यह कि बहुपत्नियों वाले परिवारों में , पत्नियों के दरम्यान , पारस्परिक ईर्ष्या का मौजूद होना स्वभाविक ही है । स्पष्ट तथ्य यह कि हरेक पत्नि , पति पर अधिकाधिक नियंत्रण चाहती है अतः पत्नियों के पारस्परिक संबंधों में छल प्रपंच की व्याप्ति , अस्वाभाविक बात नहीं है ।

 

कथा की नायिका ओबा , देवता शांगो की तीन पत्नियों में से एक है और तीनों पत्नियां अलग अलग प्राकृतिक शक्तियों की मालिक हैं । देवता शांगो , ओया और ओशुन के प्रति अधिक मोहासक्त है फलस्वरूप ओबा स्वयं को उपेक्षित महसूस करती है । वो चाहती है कि उसका पति उसे भी , उतना ही प्रेम दे जितना ओया और ओशुन को देता है । वो ओया और ओशुन से कहीं ज्यादा निष्ठावान और परिवार को समर्पित पत्नि है पर उसके हिस्से में पति के प्रेम की न्यूनता है । वो ओशुन से सहायता चाहती है किन्तु ओशुन उससे छल करती है ।  नतीजा यह कि ओबा अपने ही परिवार और पति  से तिरस्कृत हो जाती है । उसे जो भी मिला था वो उसे खो बैठती है । पति का न्यूनतम प्रेम , पारिवारिक प्रतिष्ठा और अपना आत्मसम्मान खोकर , नदी की ओरिशा , हो जाना सांकेतिक रूप से अद्भुत कथन है  । वो परिवार से टूटती है , दु:ख और आंसुओं में डूबती है और नदी के जैसी हो जाती है ।

 

नदी, भावनात्मक रूप से उथल पुथल भरी काया के जैसी । ओबा का प्यार, उसका दैवत्व , ज्यादा खोकर, कम पाने का कथन करता है । वो अपनी सौत स्वरूपा ओरिशा ओशुन की सौतिया ड़ाह  का शिकार है और उसके कथन पर सहज विश्वास का दंड भोगती है ।  उसने ऐसे देवता से प्रेम किया , जो उसके प्रेम का लेशमात्र भी लौटा नहीं सका । वो उस प्रेम की सहयात्री बनी , जो कभी , उसका हुआ ही नहीं । उसने प्यार में खुद को खोकर अपने अनुयाइयों को समझाने का मार्ग चुना । स्वयं दंडित होकर उस पर विश्वास करने वालों की सहायता के जैसा पवित्र कर्म चुना । वो जिन तक पहुंची थी , उन्होंने उसे त्याग दिया किन्तु जो लोग उस तक पहुंचते हैं । वो उनकी सहायता करती है । वो जरूरत मंद थी पर उसे तिरस्कार मिला लेकिन वो खुद किसी भी जरूरत मंद का तिरस्कार नहीं करती ।