बेहद
खूबसूरत और कमसिन हायसिंथस यूं तो स्पार्टन शहजादा था पर उसका ज्यादातर वक्त संगीत
और सूर्य के देवता अपोलो के साथ गुज़रता, वो दोनों अक्सर साथ में शिकार खेलने जाते, एक दूसरे के साथ
खेलते रहते । हायसिंथस और अपोलो की दोस्ती, दरअसल नश्वर इंसान और अमर देवता के
दरम्यान पनपी हुई मुहब्बत थी । इधर पश्चिमी हवा का देवता ज़ेफिर, हायसिंथस और अपोलो
के इश्क को लेकर बेहद ईर्ष्यालु हो गया था क्योंकि वो खुद भी हायसिंथस का प्यार
पाना चाहता था । हालांकि हायसिंथस का साथ पाने की उसकी तमाम कोशिशें नाकामयाब हुई
थीं । मुहब्बत में अपनी शिकस्त के मद्देनजर ज़ेफिर का गुस्सा धीरे धीरे बढ़ता जा रहा
था । वो किसी भी तरह से, किसी भी हद मे जाकर, इस इश्क पर लगाम लगा देना चाहता था ।
शहजादा हायसिंथस
जब भी मछलियों के शिकार पर जाया करता तो देवता अपोलो जाल लेकर उसके साथ जाता, अगर
हायसिंथस जंगली जानवरों के शिकार पर जाता तो अपोलो उसकी मदद के लिए कुत्तों को लेकर
साथ चलता । हायसिंथस पहाड़ों पर घूमने निकलता तो भी अपोलो उसके साथ मौजूद रहता ।
हायसिंथस के करीब रहते हुए देवता अपोलो को अपनी वीणा और तीरों तक की सुध बुध नहीं
रहती । इधर उन दोनों का प्यार ज़ेफिर की बर्दाश्त से बाहर हो गया था । एक तेज धूप
वाली दोपहर में, अपोलो और हायसिंथस एक दूसरे के साथ खिलखिलाते, हंसी मजाक करते
हुए, डिस्कस फेकने का खेल खेल रहे थे इसी दरम्यान अपोलो ने पूरी ताकत से डिस्कस को
आसमान में उछाल दिया जिसे पकड़ने के लिए हायसिंथस पूरे जोश के साथ तैयार हो गया था ।
ज़ेफिर के लिए यह एक अवसर था, उसने डिस्कस की दिशा बदल दी और फिर खेल, खेल ना रहा । डिस्कस, हवा की पूरी ताकत के साथ हायसिंथस के माथे से जा टकराया और वो लहूलुहान होकर जमीन पर गिर गया । देवता अपोलो ने जमीन पर बेसुध पड़े हायसिंथस को गोद में लेकर बचाने की बहुत कोशिश की लेकिन उसकी कोशिशें व्यर्थ हो गईं । चोट बहुत गहरी थी और अपोलो का उपचार उसके लिए पर्याप्त सिद्ध नहीं हुआ । हायसिंथस की गर्दन उसके कांधों पर लुढ़क गई । अपोलो का चेहरा पीला पड़ चुका था वो चिल्लाया, हायसिंथस तू मर रहा है, मैंने तेरी जवानी छीन ली, तेरा शोक मेरा गुनाह है, काश मैं तेरे लिए खुद मर पाता पर ये असंभव है इसलिए तू मेरे यादों और गीतों में सदैव जीवित रहेगा, मेरी वीणा हमेशा तेरे ही लिए सुर साधा करेगी, तू मेरे पश्चाताप का फूल बन जाएगा । अपोलो के आर्तनाद के दौरान ठीक उसी जगह एक खूबसूरत फूल उग आया जहां हायसिंथस का रक्त बहा था ।
ये दु:खद
गाथा, ग्रीक पौराणिक आख्यानों का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां एक नश्वर शहजादे
हायसिंथस और एक अमर देवता अपोलो की समलैंगिक प्रणय गाथा का विवरण मिलता है , कथा
के तीसरे कोण में वायु देवता ज़ेफिर की उपस्थिति एक खलनायक के जैसी है क्योंकि वह
भी हायसिंथस का प्रेम पाना चाहता था और देवता अपोलो की सफलता ने हायसिंथस को उससे
दूर कर दिया था । इश्क में नाकाम देवता ज़ेफिर ने अपनी असफलता को हायसिंथस की
मृत्यु में बदल डाला, प्रेम-मय खेल की असामयिक मृत्यु । डिस्कस के वायु वेगवान
प्रहार ने युवा कदाचित कमसिन हायसिंथस के प्राण ले लिए । हायसिंथस की प्राण रक्षा
में असफल और शोक में डूबे देवता अपोलो, हायसिंथस को एक फूल में बदल देते हैं । हायसिंथस जो एक नश्वर
मनुष्य था और हम सभी मनुष्यों का प्रतिनिधित्व करता है,वो देवता अपोलो की चाहत का
केंद्र था । कथनाशय शायद यह कि सभी नश्वर लोग, दिव्य शक्ति की चाहत का केंद्र हो
सकते हैं ।
इस
आख्यान से यह संकेत मिलता है कि अगर पुरुष पुरुष से प्रेम करता हो तो समलैंगिकता
भी पवित्र और पूज्यनीय है । मिथक में बयान किया गया इश्क, प्रथम दृष्टया भले ही दु:खांत
दिखाई देता है पर वो नश्वरता की आकस्मिक मृत्यु के बाद भी जीवित रहा, हरेक बसंत
में, पिछले बसंत के बीजों से पुरुत्पादन की लय, नित्यता के साथ, नश्वरता की क्रमिक
अमरता के जैसा । एक फूल जो खूबसूरत है, मरता है और जीता है बारम्बार, देवता अपोलो
जो हायसिंथस की आकस्मिक मृत्यु से शोकाकुल था किन्तु अपने अपराध बोध को स्वीकारते
हुए भी, खुद मर नहीं सकता था क्योंकि वह तो अमरत्व का चिरयात्री है, सो उसने
हायसिंथस के लिए नई तरह की नित्यता, अमरत्व का चुनाव किया । किंचित विरह और फिर
पुनर्मिलन की सतत यात्रा, कदाचित इस संदेश के साथ कि प्रियतम से अलगाव स्थायी नहीं
होता यदि उसमें एक अल्प विराम है तो पुनर्मिलन की आस भी है ।
सूर्य के रात्रिकालीन गोपन अस्तित्व के समांनातर हरेक अगली सुबह सूर्य की दृष्टव्य उपस्थिति के जैसा । इस आख्यान में देवता अपोलो की वीणा हायसिंथस के लिए सुर साधती है , देवता के गीत हायसिंथस के लिए प्रेम पगे हैं , दुख , सुख भरी यादों से भरे पड़े हैं । हायसिंथस जिसने योनि बदली है , काया बदली है । देवता अपोलो, जिसे प्रेम ने, इंसान बनाए रखा और देवता ज़ेफिर जिसे प्रेम की असफलता ने मनुष्यों की तरह खलनायक और हत्यारा बना दिया । बहरहाल मिथक संकेत यह कि प्रेम में समलैंगिकता या विषमलिंगीयता का भेदभाव नहीं । कथा प्रातीतिकता यह कि ईश्वर और मनुष्यों में द्वैध का भाव नहीं है अंततः ईश्वर भी जीता है प्रेम या घृणा में, मनुष्यों की तरह से...