गुरुवार, 24 सितंबर 2026

ताने-महुता

कहते हैं कि ताने-महुता ने धरती मां पापातुआनुकु और आकाश पिता रांगिनुई को आलिंगन से मुक्त किया था क्योंकि उन दोनों के आलिंगन से धरती पर घोर अंधकार व्याप्त था । इसके बाद , कुछ अरसा गुजरा तो ताने ने देखा कि जमीन पर चट्टान के गिरने के बाद थोड़ी सी लाल रंगत मिट्टी बिखर गई है । उसने सोचा कि  धरती पर सभी चीजें फलती फूलती और उगती हैं तो इस मिट्टी से भी नव सृजन किया जा सकता है । उसने मिट्टी को गूंथकर अपने जैसी आकृति बनाई और उसमें प्राण फूंक दिए । इसके बाद ताने ने जीवन दाई गीत गया सो मिट्टी की प्रतिमा ने आंखें खोलकर पहली बार दुनिया को देखा । प्रतिमा के अंगों में ऊर्जा दौड़ने लगी थी इसलिए वो उठकर खड़ी हो गई और आहिस्ता आहिस्ता चलने लगी ।  ताने ने इसका नाम टिकी रखा जो दुनिया का पहला इंसान था ।

 

दिलचस्प बात ये कि टिकी के जिस्म के सभी अंदरूनी अंगों की रंगत भी लाल मिट्टी के जैसी थी ।  सिरजनहारा ताने, उस इंसान टिकी की नज़रों से अदृश्य था । टिकी को चलकर जंगल के दरख्तों की ओर जाते हुए देखना ताने के लिए अद्भुत अनुभव था । जंगल जहां परिंदे चहक रहे थे । ताने द्वारा सृजित, पहले इंसान को देखने के लिए अनेकों अदृश्य देवियाँ आसमान में परवाज कर रहीं थीं, वो बुदबुदाईं , इस इंसान को एक साथी की जरूरत होगी । दरख्तों के इर्द गिर्द परिंदों के गीतों की गूंज के समांतर , धूप कंपकपाते हुए धरती तक पहुँचने की कोशिश कर रही थी ।  बहरहाल उन देवियों ने हल्की सी धुंध बुनी और उसे दुनिया की पहली औरत की शक्ल दे दी । अब ताने का शाहकार टिकी अकेला नहीं रहा, उसके पास देवियों के उपहार बतौर एक औरत भी थी । 

 

वो दोनों उसी जंगल में रहने लगे जहां उनकी संताने , उनके वंशज आज भी रहते हैं ।  इस घटनाक्रम के बाद ताने, पूर्वी दिशा में स्थित झील के करीब मौजूद,  तू नाम के बगीचे मे रहने लगा । तू , जहां सूरज की पहली किरणे अपने पाँव पसारती हैं । जंगल में रहने वाले लोगों को ताने के बागीचे से नाव और घर बनाने की लकड़ियाँ , रस्सियों और कपड़ों की बुनावट  के लिए रेशेदार वनस्पतियाँ और पत्ते , खाने के लिए कंद और बेरियाँ तथा झील से मछलियाँ मिलीं लेकिन जीवन की आपा धापी में तू , ने उन्हें आखेट करने के कला भी सिखाई , आखेट यानि योद्धा जैसी दक्षता । इसलिए वे लोग ताने को युद्ध के देवता की तरह से पूजने लगे हैं और अब शांति , दुनिया से कहीं और पलायन कर गई है ।

 

यह माओरी आख्यान सृष्टि के प्रथम पुरुष टिकी और प्रथम स्त्री मारिकोरिकों के सृजन वर्णन करता है । इस मिथक का मुख्य नायक ताने-महुता है जो जंगल और पक्षियों का देवता है । जिसे कालांतर में युद्ध का देवता भी कहा गया है । वो आकाश और धरती का पुत्र है , जिसने लंबे समय से आलिंगनबद्ध माता पिता को आलिंगन से मुक्त कर धरती को आलोकित किया था । उसका ख्याल था कि धरती में इंसानों को छोड़कर सब कुछ है सो उसने लाल मिट्टी से, प्रथम पुरुष टिकी का सृजन किया और उसमें प्राण फूंके । इस नाते ताने को टिकी का पिता भी कहा जाता है । कथा का दिलचस्प पहलू यह है कि वो टिकी के अंदरूनी अंगों और रक्त इत्यादि को लाल रंग से जोड़ती है जैसे कि लाल मिट्टी, जिससे उसका बाह्य शरीर भी गढ़ा गया था ।

 

मिथक के देवता द्वारा मिट्टी से प्रथम पुरुष का सृजन विवरण कम-ओ-बेश वैसा ही है जैसा कि यहूदी, ईसाई और इस्लामिक कथाओं में उल्लिखित है , निराकार ईश्वर द्वारा मृदा से प्रथम पुरुष का सृजन, स्मरण रहे कि टिकी के सृजन के समय ताने भी अदृश्य रूप में उद्धृत है । जन्म के उपरांत टिकी जंगल की ओर जाता है , जहां परिंदों की चहचहाहट गूंज रही थी और सूरज घने  छायादार दरख्तों के दरम्यान होकर धरती तक पहुँचने की कोशिश कर रहा था , यहां कथा में दिलचस्प बयान है कंपकपाती हुई धूप । वहाँ ताने के सृजन धर्म को देखने के लिए अदृश्य देवियाँ आसमान में मंडरा रही हैं और उन्हें टिकी के साथी बतौर, एक स्त्री के सृजन का ख्याल आता है । मिथक कहता है कि उन्होंने महीन धुंध से स्त्री को गढ़ा जो टिकी की पत्नी या प्रियतमा हुई ।

 

आख्यान का दूसरा संस्करण कहता है कि यह मारिकोरिकों थी जिसका प्रतिबिंब टिकी ने तालाब के शांत जल में देखा था।इस कथा के अनुसार इसी जंगल में टिकी और मारिकोरिको की संताने हुईं और उनकी वंशबेल द्विगुणित होती रही । कथनाशय स्पष्ट यह कि प्रथम मनुष्य जंगल-जीवी था, कदाचित आखेटक, वनोपज संकलनकर्ता और जंगल से प्राप्त सामग्री से गृह निर्मिती करने वाला । मिथक कहता है कि ताने इसी जंगल के पूर्वी छोर में स्थित झील के किनारे रहता था, जहां तू नामक बागीचा भी था, जिससे इंसानों की दैनिन्दिक जरूरते पूरी हुआ करती थीं । बहरहाल जंगल के रहवासी के रूप में टिकी और उसके वंशजों को आखेट करने का अभ्यास और हथियार जरूरी थे । दक्ष आखेटक और हथियार बंद आखेटक होना, जंगली जानवरों से अपनी सुरक्षा के लिए भी अपरिहार्य  था ।

 

जंगली जानवरों का मांस और खाल के वस्त्र भी बदलते मौसमों के विरुद्ध इंसानों के अस्तित्व को बनाए रखने का महती साधन थे हालांकि उसके पास वनस्पतियों के धागों से बुने हुए वस्त्र और खाद्याहार तो खैर थे ही । ताने ने इंसान का सृजन किया था और इस नाते वो उसका पिता तुल्य था , किन्तु जंगल के जीवन ने उसे आखेटकीय दक्षता और हथियार दिए , युद्ध कौशल दिया । परिणाम यह हुआ कि, कालांतर में पिता ताने ही युद्ध के देवता की तरह से पूजनीय हो गया ।