तुतानेकाई को अमूमन निचले कुल का युवा माना जाता था । वो
रोटोरुआ झील के मध्य स्थित मोकोइया द्वीप
में अपने तीन सौतेले भाईयों के साथ रहता था । कहते हैं कि वो मोकोइया द्वीप के
मुखिया की पत्नि के पूर्व पति की संतान था जबकि उसके तीनों सौतेले भाई मुखिया के
वास्तविक जैविक वंशज थे इसीलिए उसके सौतेले भाइयों ने उसे अपने कुल से बहिष्कृत कर
दिया था । कुल मिलाकर तुतानेकाई नाजायज संतान होने जैसा दंश झेल रहा
था हालांकि उसका पालक पिता मुखिया उसे अपनी संतान की तरह से स्नेह करता था । इसके
बरक्स हिनेमोआ झील के किनारे अपने अभिजात्य पिता के शानदार घर में रहती थी । कबीले में उसे अद्भुत सौन्दर्य की स्वामिनी माना
जाता था और कितने ही युवा उससे ब्याह करना चाहते थे, लेकिन हिनेमोआ को तुतानेकाई
से प्रेम था । तुतानेकाई के तीनों सौतेले भाइयों ने हिनेमोआ से ब्याह की पेशकश की
किन्तु हिनेमोआ ने साफ इंकार कर दिया क्योंकि वो तुतानेकाई से ब्याह करना चाहती थी । हिनेमाओ के इंकार से उसके अभिभावकों को अत्यधिक निराशा हुई ।
उन्होंने तुतानेकाई तथा उसके सौतेले भाइयों के दरम्यान दौड़
की प्रतियोगिता करवाई जिसमें तुतानेकाई विजयी हुआ , इसके बावजूद अभिभावकों ने
हिनेमोआ और तुतानेकाई के ब्याह से साफ इंकार कर दिया और तुतानेकाई को वापस मोकोइया
द्वीप वापस भेज दिया गया ताकि दोनों प्रेमी एक दूसरे से मिल ही न सकें , इसके बाद
एहतियातन झील के तट की सारी किश्तियाँ छुपा दी गईं,क्योंकि उन्हे डर था कि हिनेमोआ
किश्तियों की मदद से तुतानेकाई तक पहुँच सकती है । उधर झील के तट से लगभग 3 मील
दूर स्थित द्वीप में रह रहा तुतानेकाई हरेक रात द्वीप की पहाड़ी पर बैठकर बाँसुरी
बजाया करता था, जिसकी सुर लहरियाँ हिनेमोआ को बेचैन किया करतीं थीं । वो प्रेमी की
धुनों से रोमांचित होती और मिलन के विकल्प सोचा करती थी । उसे तुतानेकाई से जुदाई
बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रही थी , ऐसे ही लम्हों में उसने तय किया कि वो रात के अंधेरे में झील को तैरकर पार करेगी
और प्रेमी से जा मिलेगी और उसने यही किया झील का पानी बेहद ठंडा था । बाँसुरी की सुर
लहरी की दिशा में तैरती हुई हिनेमोआ के
हाथ पैर लगभग सुन्न हो चले थे ।
वो मोकोइया द्वीप तक लगातार तैरती रही और फिर उसने खुद को
द्वीप में स्थित एक गरम कुंड में छुपा लिया उसे भय था कि अगर किसी अन्य युवा ने उसे
देख लिया और उसे पकड़ कर अपनी झोपड़ी में ले गया तो माओरी रिवाज के मुताबिक हिनेमोआ
को उस युवा से ब्याह करना पड़ेगा । पानी की गर्माहट से उसका जिस्म सामान्य हो चला
था इसलिए उसने तब तक खुद को छुपाये रखना बेहतर जाना , जब तक कि तुतानेकाई नहाने के
लिए उस कुंड में ना आ जाए , बहरहाल ऐसा ही
हुआ तुतानेकाई नहाने आया तो अचानक ही हिनेमोआ उसके सामने खड़ी हो गई , तुतानेकाई
अपनी प्रेमिका के साहस से हतप्रभ था और खुश भी , फिर दोनों ने एक साथ मिलकर तुतानेकाई की झोपड़ी
में शरण ले ली, सो परंपरा के अनुसार , कबीले
को उनके ब्याह के लिए राजी होना पड़ा , उनके प्रेम की सफलता से सौतेले भाई बेहद
नाराज हुए , उन्होंने मारपीट करना चाही लेकिन उनके पिता ने हिनेमोआ और तुतानेकाई
की रक्षा की क्योंकि वो कबीले की परंपरा का सम्मान करता था और उसे प्रेमी द्वय के
ब्याह से अब कोई ऐतराज शेष नहीं रह गया था ।
यह आख्यान न्यूजीलैंड के माओरी आदिवासियों को संबोधित है
जिसमें नायक और नायिका एक दूसरे से बेतहाशा प्रेम करते है किन्तु नायक तुतानेकाई , अपने पालक पिता की जैविक संतान नहीं था बल्कि उसकी मां के पूर्व
पति की जैविक संतान था और उसकी मां ने कालांतर में उसके पालक पिता से ब्याह कर
लिया था । सामान्यतः आदिवासियों में विवाह , पुनर्विवाह और पूर्ववर्ती संतानों को
लेकर कोई रूढ निषेध नहीं होते हैं फिर भी तुतानेकाई को मुख्य भूमि से विस्थापित
करते हुए झील के मध्य स्थित द्वीप में बसने के लिए मजबूर किया गया था , संभवतः तुतानेकाई
के सौतेले भाइयों की शुद्ध सामाजिक प्रतिष्ठा को उनके जैविक पिता से जोड़ते हुए , तुलनात्मक स्थिति में , पालक पिता के पुत्र के
रूप में , तुतानेकाई को हीन सामाजिक प्रतिष्ठा वाला माना गया हो , अन्यथा इस कथा
में नायक तुतानेकाई के पालक पिता और नायिका हिनेमोआ के जैविक पिता के दरम्यान
सामाजिक आर्थिक प्रतिष्ठा अथवा अप्रतिष्ठा का अन्य कोई संकेत मिलता भी नहीं है ।
उल्लेखनीय तथ्य यह कि नायिका के परिजनों ने
नायक के सौतेले भाइयों के वैवाहिक प्रस्ताव को ठुकराया भी नहीं था ।
सौतेले भाइयों के वैवाहिक प्रस्ताव को ठुकराने का निर्णय हिनेमोआ
ने स्वयं लिया क्योंकि उसे तुतानेकाई से प्रेम था और आदिवासी समाज की युवतियों को
अपना वर स्वयं चुनने का अधिकार तो खैर होता ही है । परिजनों ने सौतेले भाइयों और
नायक के मध्य हुई प्रतिस्पर्धा का परिणाम भी देखा किन्तु उन्हे बतौर दामाद नायक,
स्वीकार्य नही था । नायिका के परिजन और नायक के सौतेले भाई , नायिका के निर्णय से
क्रुद्ध और असहमत हैं सो नायक पुनः बहिष्कृत हुआ और उसे झील के मध्य स्थित द्वीप
में विस्थापित कर दिया गया, इतना ही नहीं नायक और नायिका के मिलन की संभावना को
समाप्त करने की गरज से किश्तियाँ भी छुपा दी गईं । नायिका प्रियतम से बिछोह नहीं चाहती
थी । उसे प्रियतम की बाँसुरी की धुन , सम्मोहन की हद तक प्रिय थी इसलिए उसने बर्फीले
पानी की झील को तैरकर पार करने का दुस्साहसिक निर्णय लिया । उसने अपनी जान जोखिम में
डाली और बाँसुरी के सुरों की दिशा में तैरती रही , यहां पर कथा का एक अन्य संस्करण
कहता है कि नायिका ने खाली तूंबों को एक साथ बांधकर एक वैकल्पिक किश्ती बना कर यह यात्रा
पूरी की थी ।
बहरहाल रात का अंधेरा , बेहद ठंडा पानी , तेज बर्फीली हवा और मुख्य भूमि से द्वीप की दूरी , उस अकेली युवती के हौसले को पस्त नहीं कर सके, क्योंकि उसे प्रेम था । द्वीप में गर्म पानी के कुंड ने नायिका को छुपने और जिस्म की ऊर्जा को पुनः बहाल करने में मदद की । कुंड में नायिका का छुपना प्रेम मार्ग की एक सामाजिक बाधा से निजात पाने के लिए था । जिसके कारण प्रियतम से मिलने की उसकी सारी मेहनत अकारथ हो जाती यदि कोई अन्य युवा उसे पकड़कर अपनी झोपड़ी में ले जाता तो । युवती को मजबूरी में ही सही अपने कबीले की परंपरा के अनुपालन में उस युवक को अपना पति मान लेना पड़ता । नायिका जोखिम नहीं लेना चाहती थी सो उसने नायक का इंतजार किया कि जब भी वो तप्त कुंड में नहाने आएगा तो वो उसके साथ जाकर उसके झोंपड़े में शरण ले लेगी और तब समाज को उन दोनों के ब्याह को स्वीकार करना ही होगा । नायिका का आकलन सही था, नायक उसे वहीं मिला और वो खुशी से बौराये हुए नायक के साथ उसके झोंपड़े के अंदर जा पहुंची सो उनके ब्याह को सामाजिक स्वीकृति और नायक के पालक पिता का स्नेह संरक्षण भी प्राप्त हो गया ।