बुधवार, 9 सितंबर 2026

आशीषित प्रेम

मुद्दतों पहले की बात है जब एक नन्हें से गांव में एक युवा जोड़ा रहता था । वो दोनों एक दूसरे के इश्क में मुब्तिला थे और अक्सर छुप-छुपकर मिलते । उनकी आंखें प्यार से रोशन होतीं और ऐसा लगता गोया उस वक्त दुनिया में और कोई शय मौजूद ही ना हो , पूरी कायनात में सिर्फ यही जोड़ा अव्वल और आखिरी जोड़े बतौर जिंदा हो । एक रोज युवा प्रेमी ने अपनी प्रेयसी से पूछा कि , क्या वो उससे ब्याह करेगी ? युवती ने कहा , तुमसे ब्याह करना मेरे लिए सम्मान की बात है । ये सिलसिला चलता रहा । उनका इश्क , उनके लिए अंतहीन था लेकिन युवती के पिता के मन में अपनी बिटिया के ब्याह की जो तस्वीर थी उसमें , युवा प्रेमी का नाम–ओ –निशान तक नहीं था । एक रोज पिता ने अपनी बिटिया से कहा कि मैंने तुम्हारे लिए एक धनसंपन्न परिवार का युवा चुन लिया है और जल्दी ही मैं तुमसे , उसका ब्याह कर दूंगा । पिता के फैसले से युवती स्तब्ध रह गई , उसकी दुनिया असीम सन्नाटे से भर गई ।

युवती ने अपने पिता के साथ ही साथ अपनी मां से भी मिन्नतें कीं , कि वो किसी और युवा से प्रेम करती हैं और उसका ब्याह उसके प्रेमी युवा से कर दिया जाए पर अभिभावकों ने उसकी एक ना सुनी । अभिभावकों का ख्याल था कि उनका फैसला युवती के हित में है और वो उनके द्वारा चुने गए वर के साथ आजीवन सुखी रहेगी । बहरहाल उन्होंने युवती की मांग ठुकरा दी और कहा कि हमारा फैसला अंतिम है । युवती को समझ में नहीं आया कि उसके मां बाप इतने निष्ठुर क्यों हैं ? उसे खुद की जिंदगी बेरहम लगने लगी थी । ऐसे ही हालात में एक रोज वो अपने प्रेमी की बांहों में ढह गई और बिलख बिलख कर, अपने अभिभावकों की जिद का ब्योरा दिया । युवा प्रेमी बदहवास सा सुनता रहा । उनके आंसू मानो सैलाब हो गए थे पर युवती के पिता की जिद बदस्तूर कायम रही और एक दिन उसने सोने की अंगूठी की मार्फत प्रेमी जोड़े को हमेशा हमेशा के लिए एक दूसरे से दूर कर दिया ।

युवती अपने पति  से प्रेम नहीं करती थी और उसने पति को इसकी वज़ह भी बता दी थी सो उनके वैवाहिक जीवन में कोई अपनापा शेष नहीं रहा । इधर प्रेमी युवा , प्रेमिका की जुदाई को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था।वो गुमसुम रहता, कम सोता, कम खाता और धीरे धीरे उसका जिस्म उसका साथ छोड़ गया । उसके बेबस और लाचार परिजनों ने उसे गांव के आराधना स्थल की दीवाल के इस पार सुपुर्दे खाक कर दिया । उसके देहांत की खबर पाकर उसकी प्रेमिका बावली सी हो गई और उसने भी खुद पर और खुद की सेहत पर ध्यान देना छोड़ दिया । वो कमजोर होती गई और कुछ ही दिनों के बाद उसने भी , इस नश्वर दुनिया को छोड़ दिया । मरने से पहले उसने अपने निकट संबंधियों से गुजारिश की थी कि उसे उसके युवा प्रेमी की कब्र के निकट ही दफनाया जाए ताकि वो मृत्यु के बाद ही सही , अपने प्रेमी के पास रह सके लेकिन युवती के पिता ने उसकी आखिरी इच्छा का सम्मान नहीं किया वो पहले के तरह जिद में बने रहे ।

युवती को आराधना स्थल की दीवाल के दूसरी ओर दफ़नाया गया । कुल मिलाकर मरणोपरांत भी उन दोनों के दरम्यान एक दीवाल मौजूद थी । समय गुज़रता  गया और दोनों की कब्रों के निकट रोवन के दरख्त उग आए थे जिन्होंने कब्रों के दरम्यान मौजूद दीवाल के ऊपर से एक दूसरे को बांहों  में भर लिया था । कहते हैं कि एक बढ़ई  को फर्नीचर बनाने के लिए लकड़ी की जरूरत थी तो उसने इन दोनों दरख्तों को काट डाला लेकिन उसे अपनी नासमझी का मोल चुकाना पड़ा वो पैरों से अपाहिज हो गया और उसे चलने के लिए लकड़ी के बेंत की जरूरत पड़ने लगी । उसकी तकदीर फिर कभी उस पर मेहरबान नहीं हुई लेकिन रोवन के दरख्तों के ठूँठों से एक बार फिर से कोपले फूटीं और लगातार ऊंची होती गईं । कुछ अरसे के बाद उन शाखों ने फिर से दीवाल की बाधा पर करते हुए एक दूसरे को बांहों में भर लिया था, कुछ ऐसे जैसे कि यह अमर प्रेम था और मरने के बाद भी बना रहा । 

ये आयरिश आख्यान अत्यंत सहजता से कहता है कि छोटे से गांव में एक युवक और युवती के दरम्यान प्रेम पनप चुका है और दोनों एक दूसरे से ब्याह करने के लिए सहमत हो चुके हैं । हालांकि उन्हें समाज से भय अथवा संकोच है तो वे अपने रोमांस को छुपाने की गरज से छुप छुप कर मिलते हैं । बहरहाल शादी करने की पारस्परिक सहमति के उपरांत उनके भावी जीवन में एक्य की संभावना सुस्पष्ट है लेकिन ज्यादातर प्रेम कथाओं की तरह से इस गाथा में भी माता पिता की चिंताएं और निर्णय कुछ और ही हैं । पिता को अपनी बिटिया के लिए आर्थिक रूप से सशक्त वर चाहिए और वो भी परंपरागत ब्याह की परिपाटी पर आधारित । पिता को बिटिया की प्रणय गाथा से कोई लेना देना नहीं है और उसका निर्णय जिद की हद तक स्वयं के द्वारा चुने गए वर को बिटिया पर आरोपित करने तक सीमित है । युवती अपने माता पिता से निराश है और उसका दिल टूट चुका है पर उसके सामने दूसरा कोई विकल्प नहीं है ।

प्रेमी युवक और युवती घटनाक्रम से आहत हैं , वे बिलखते है और आंसुओं के सैलाब में डूब डूब जाते हैं । उनके प्रेम के सामने अटूट विरह स्पष्टतः परिलक्षित है । इस कथा में ब्याह का कोई विस्तृत वर्णन नहीं किया गया है बल्कि सांकेतिक रूप सोने की एक अंगूठी के मार्फत दोनों के बिछोह की पटकथा लिख दी गई है, केवल एक वाक्य अद्भुत प्रतीकात्मकता के साथ प्रेमी द्वय को अलग अलग राहों का मुसाफिर बना देता है और वो युवती, उसके पिता की पसंद के युवा के साथ ब्याह दी जाती है । हालांकि ब्याह के बाद, युवती अपने पति से, अपने अतीत के प्रेम संबंधों का हवाला देते हुए, असामान्य से वैवाहिक जीवन का बोझ ढोने लग जाती है । कथा के इस मोड़ पर यह मानना कठिन नहीं है कि युवती का पति भी अपनी पत्नि के प्रति उदासीनता भरा रुख अख्तियार कर लेता है । दूसरी ओर, प्रेमिका से बिछड़ चुका प्रेमी दु:खी और वैरागी सा जीवन जीने लगता है । उसे अपनी सेहत और खान पान की सुध नहीं रहती, जिसकी परिणति, उसके निधन के रूप में हो जाती है ।

प्रेमी युवा के परिजन, उसके शव को गांव के आराधना स्थल की दीवाल के बाहर दफन कर देते हैं । आख्यान के विवरण से ऐसा प्रतीत होता है कि गांव का आराधना स्थल और कब्रिस्तान एक ही भूखंड पर स्थापित है जिसे संभवतः दीवाल के सहारे दो हिस्सों में बाँट दिया गया है । इस कथा से एक संकेत यह भी मिलता है कि गांव के सम्पन्न परिवारों के शव दीवाल के अंदरूनी हिस्से की ओर दफनाए जा सकते हैं जैसा कि युवती के प्रकरण में किया गया है ।  प्रेमी की मृत्यु से प्रेमिका आहत है और सांसारिक जीवन त्यागने मे देर नहीं करती। कथानुसार, उसकी ससुराल पक्ष के लोग उसकी मृत्यु से असंपृक्त बने रहते हैं और उसे, अपने मातुल गांव में ही दफन किया जाना है । मातुल गांव के लोग इच्छुक हैं कि प्रेमी जोड़े की कब्रें आस पास होना चाहिए किन्तु युवती का पिता अब भी जिद में है और वो दीवाल के अंदरूनी हिस्से में युवती की कब्र की निर्मिति करता है।बहरहाल इस दूरी को निकटता में बदलने की जिम्मेदारी अब पारलौकिक शक्तियों की है क्योंकि वे प्रेम के पक्ष में है ।

मिथक संकेतों के अनुसार दोनों कब्रों में रोवन के दरख्तों का उगना और दरम्यानी दीवाल को लांघ कर गुत्थम गुत्था हो जाना पारलौकिक शक्तियों का किया धरा है । प्रेमी युगल के इस प्रतीकात्मक एकत्व को गांव का एक जरूरतमंद बढ़ई, फर्नीचर बनाने के नाम पर क्षतिग्रस्त कर देता है और देवत्व के दंड का भागीदार बन जाता है । वो आशीषित प्रेम का गुनहगार है सो अपाहिज और बैसाखियों पर रेंगने वाला इंसान हो गया। बहरहाल उसने, रोवन दरख्तों के ठूंठ छोड़े थे जो फिर से हरियाये और नई शाखें एक बार फिर से दीवाल की बाधा पार करते हुए एक दूसरे की बांहों में सिमट गईं...