रविवार, 23 जून 2019

नीला आलोक


एक समय की बात है, जब एक सैनिक, अपने राजा का विश्वस्त सेवक था ! वो राजा की ओर से, अनेकों युद्ध लड़ा और घायल हुआ ! लेकिन राजा को घायल सैनिक की सेवाओं की आवश्यकता नहीं थी सो राजा ने कहा, अब तुम अपने घर वापस जाओ ! मैं तुम्हें अधिक समय तक वेतन नहीं दे पाऊंगा ! उस सैनिक को किसी अन्य तरीके से धन कमाने की जानकारी नहीं थी ! वो आकस्मिक तौर पर नौकरी छूट जाने से परेशान था और भटकते हुए सघन जंगल में जा घुसा, रात गहरा गई थी, उसने देखा दूर कहीं हल्की सी रौशनी दिखाई दे रही है ! उसने सोचा कोई रहता होगा, वहाँ ! कम से कम रात का ठिकाना तो मिल ही जाएगा ! वो नहीं जानता था कि उस कुटिया में बूढ़ी चुड़ैल रहती है ! उसने बूढ़ी से कहा, मुझे रात भर विश्राम की जगह दो, थोड़ा सा खाना और पानी भी, वर्ना मैं मर जाउंगा ! ओह ! भगोड़े सैनिक पर कौन विश्वास करता है ? मैं तुम पर दया, क्यों करूं ? अगर तुम चाहते हो कि मैं तुम्हारी मदद करूं तो तुम्हें मेरी एक इच्छा पूरी करना होगी, चुड़ैल ने कहा ! सैनिक ने पूछा, तुम क्या चाहती हो ? मैं चाहती हूं कि तुम कल सुबह मेरे घर के चारों तरफ एक बागीचा बनाओ ! सैनिक इस काम के लिए सहमत हो गया ! इसके बदले में उसे चुड़ैल के घर में रात का ठिकाना और खाना मिल गया !

अगले दिन सैनिक काम में लग गया, लेकिन वो शाम तक पूरा बागीचा नहीं बना सका ! चुड़ैल ने कहा, ये पर्याप्त नहीं है, तुम एक रात और रुको ! अगले दिन मैं तुम्हें कोई दूसरा काम दूंगी ! सुबह चुड़ैल ने लकडियों को काट कर छोटे छोटे टुकड़े बनाने का काम सैनिक को सौंपा, किन्तु शाम तक पूरी लकडियाँ काटी नहीं जा सकीं ! इस पर चुड़ैल ने सैनिक से कहा, तुम कोई काम समय पर पूरा नहीं कर पाते हो ! एक रात और रुको और कल सुबह घर के पिछवाड़े वाले सूखे कुँवें में गिर गई मेरी नीली रौशनी को निकाल देना ! बहरहाल सुबह सैनिक को एक टोकरी के सहारे कुँवें में उतार दिया गया और उसने गुमशुदा नीली रौशनी को खोज लिया ! वो चिल्लाया मुझे वापस ऊपर खींचो ! चुड़ैल ने ऐसा ही किया, लेकिन कुँवें की मुंडेर पर उसने वो नीली रौशनी सैनिक के हाथों से खींच लेना चाही ! सैनिक उसकी नीयत भांप चुका था ! उसने कहा ठहरो, ये मैं तुम्हें तब दूंगा, जब ज़मीन पर अपने दोनों पैरों के बल पर खड़ा हो जाऊंगा ! लेकिन चुड़ैल ने उसे वापस कुँवें में गिरा दिया ! गीली मिट्टी पर गिरते ही सैनिक समझ गया कि वो मौत के पाश में फंस गया है ! नीली रौशनी जल रही थी पर उससे सैनिक का क्या भला होने वाला था ? वो वहीं बैठ गया, दु:खी और निराश ! तभी उसे ख्याल आया कि उसकी जेब में अधजला सिगार बचा हुआ है ! 

उसने सोचा शायद यह मेरा अंतिम सुख होगा ! नीली रौशनी से सिगार जलाकर सैनिक ने एक गहरा कश लिया और छल्ले की शक्ल में धुंवा बाहर छोड़ा ! तभी उस धुंवें में से एक काला बौना प्रकट हुआ ! उसने कहा, मेरे स्वामी, क्या आज्ञा है ? सैनिक चौंक गया ! उसने कहा, ठीक है, सबसे पहले मुझे यहाँ से बाहर निकालो ! बौने ने सैनिक का हाथ पकड़ा और कुँवें के नीचे एक सुरंग में ले गया, जहां तहखाने में हीरे जवाहरातों के ढेर लगे थे, जिन्हें चुड़ैल ने इकठ्ठा किया था ! सैनिक अपने साथ नीली रौशनी लेना नहीं भूला ! उसने जितना भी संभव हुआ, हीरे जवाहरात समेट लिए ! कुँवें से बाहर आकर उसने बौने से कहा जाओ, उस चुड़ैल को बाँध कर न्यायाधिपति के सामने पेश करो ! थोड़ी ही देर में चुड़ैल के भयावह आर्तनाद सुनाई देने लगे और फिर सब कुछ शांत हो गया ! बौना वापस लौटा और उसने कहा चुड़ैल को मृत्यु दण्ड दे दिया गया है ! बौने ने पूछा और कोई आज्ञा स्वामी ! सैनिक ने कहा, अभी तुम जाओ जब मुझे ज़रूरत होगी तब मैं तुम्हें बुला लूंगा ! बौना नीली रौशनी में समा गया ! सैनिक अपने गाँव वापस चला गया जहां उसने अपने लिए शानदार घरबेहतरीन कपड़ों और आरामदेह चीजों की व्यवस्था कर ली ! एक दिन उसने बौने को बुलाया और बोला कि मैंने राजा की तन मन से सेवा की,पर राजा ने मुझसे दुर्व्यवहार करते हुए नौकरी से निकाल दिया ! मैं उससे बदला लेना चाहता हूं, तुम जाओ और राजकुमारी को यहां लेकर आओ ताकि वो नौकरों की तरह से मेरी सेवा करे ! 

बौने ने कहा ये तो बहुत आसान काम है, लेकिन राजा को ये बात पता चल गई तो आप मुसीबत में पड़ जायेंगे ! रात में ठीक बारह बजे बौना, निद्रालीन राजकुमारी को उठा लाया ! सैनिक खुशी से चिल्लाया ! आहा ! चलो मेरा घर साफ़ करो ! मेरे जूतों में पालिश करो और...और...और...कई काम कहे, उसने ! राजकुमारी, नींद में वो सब काम करती रही ! इसके बाद मुर्गे की पहली बांग से पहले बौने ने राजकुमारी को वापस महल में पहुंचा दिया ! सुबह राजकुमारी ने अपने पिता से कहा, मैंने रात में एक बुरा सपना देखा है ! कल रात मुझे कोई बिजली की गति से कहीं दूर ले गया और वहाँ पर मुझसे घर के नौकर की तरह से सारे काम करवाए गए ! हालांकि यह एक स्वप्न था पर मुझे थकान महसूस हो रही है ! ये सुनकर राजा ने कहा, ये सपना सच भी हो सकता है ! अगली रात में तुम अपनी जेब में मूंगफल्ली के दाने भर लेना और ध्यान रहे कि जेब में एक छेद भी हो ! बहरहाल राजकुमारी के लिए, अगली रात, पुरानी रात जैसी ही गुज़री लेकिन राजा की योजना धराशाई हो गई क्योंकि सड़कों से गरीब बच्चों ने मूंगफल्ली के सारे दाने चुन लिए थे, इसलिए राजा को घटना स्थल का कोई सूत्र नहीं मिला ! इसके बाद राजा ने कहा, आज तुम जूते पहन कर सोना और उस घर में अपना एक जूता छुपा कर रख देना फिर हम उस जगह को ढूंढ निकालेंगे ! बौने ने राजा की योजना सुन ली और सैनिक को चेतावनी दी कि इस तरह की गतिविधियां रोक दीं जाएं, वर्ना मुसीबत खड़ी हो जायेगी !

सैनिक चिल्लाया, तुम सलाह मत दो, वैसा ही करो जैसा मैं कहता हूं ! बौना मजबूर था, उसने सैनिक का आदेश, मान लिया ! उस रात राजकुमारी ने महल वापसी से पहले अपनी एक जूती सैनिक के बिस्तर के नीचे छिपा दी ! अगली सुबह राजा के सैनिकों ने नगर, गांव में छापामार कार्यवाही शुरू कर दी, जल्द ही उन्हें भूतपूर्व सैनिक के घर से राजकुमारी की जूती मिल गई ! उसे बंदी बना लिया गया ! हालाँकि उसने काल कोठरी के एक पहरेदार से कहा, तुम मेरे घर से मेरा सिगार और नीली रौशनी ला दो, मैं इसके बदले तुम्हें सोना दूंगा ! पहरेदार मान गया और उसने बंदी सैनिक का सामान लाकर उसे दे दिया ! सैनिक ने सिगार जला कर बौने को बुलाया तो बौने ने कहा, डरो मत जहां वे ले जाएं, चुपचाप चले ना ! लेकिन अपने साथ नीली रौशनी रखना मत भूलना ! अगले दिन राजा के दरबारी न्यायाधीशों ने उसे मृत्यु दण्ड दिया ! इस पर बंदी सैनिक ने राजा से पूछा कि, क्या मैं एक सिगार पी सकता हूं ? राजा ने कहा, एक नहीं, तीन तीन पी लो, मगर ये मत सोचना कि मैं पुराने दिन याद कर के तुम्हारी जान बख्श दूंगा ! इसके बाद बंदी सैनिक ने सिगार जलाया तो बौना एक नन्हीं गदा लेकर प्रकट हुआ और उसने पूछा क्या आज्ञा है स्वामी सैनिक चिल्लाया, इन न्यायाधीशों और सैनिकों को मार डालो ! इस राजा ने मेरे साथ बुरा व्यवहार किया है, इसे भी छोड़ना नहीं ! बौना सब पर कहर बन कर टूट पड़ा ! उसने सभी को मार डाला ! राजा बहुत डर गया था,उसने अपने आपको उस सैनिक के सामने समर्पित कर दिया, अपनी राजधानी उसे सौंप दी और राजकुमारी के साथ उसका ब्याह कर दिया !

 (फिलहाल कोई व्याख्या नहीं )

6 टिप्‍पणियां:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 23/06/2019 की बुलेटिन, " अमर शहीद राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी जी की ११८ वीं जयंती - ब्लॉग बुलेटिन “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. कहानी तो मजेदार हैं लेकिन अंत समझ नहीं आया मतलब ये तो आम कहानियों जैसा हो गया , जहाँ राजकुमारियों की अपनी मर्जी नहीं होती मुर्ख राजा अपनी बेटियों के साथ संपत्ति का व्यवहार करता हैं | आपकी व्याख्या होती तो और मजेदार लगती और आपका भी नजरियां पता चलता | वैसे किस देश की लोककथा हैं ये |

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  3. मेरी टिप्पणियां क्यों नहीं नजर आ रहीं पोस्ट पर |

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