रविवार, 26 जून 2011

तुम्हारा चाहने वाला खुदा की दुनिया में मेरे सिवा भी कोई और हो खुदा ना करे !

अरसा गुज़रा कोई पोस्ट नहीं डाली , भला डालता भी तो कैसे ? उधर देश के हालात और इधर अपनी परसोना के  हल्के भारी पहलुओं पे नज़र-ए- सानी  का  वक़्त जो  था ! सोचता रहा ,कमाल के लोग हैं वे जिन्हें अपनी छोड़ , देश की फिक्र खाये जा रही है और एक मैं हूं जो अपनी ही में मुब्तिला हूं  ! बीबी ने कहा गैस सिलेंडर का जुगाड  कीजिये मैंने कहा कल देख लूंगा ! जो कहा सो देखा भी कल ही...पर बीबी ने बढ़ी हुई कीमत के पचास रुपये मेरी  पाकेट मनी से काट लिये ,एक  दिन की देरी के लिये उसके बजट में गुंजायश भी कहां थी ! उसे महीने में फ़कत  दो नग सिलेंडर चाहिये और मुझे अपने चौपाये के लिये तकरीबन चालीस लीटर पेट्रोल उस पर तुर्रा ये कि कोई  आदत, कोई शौक , कोई व्यसन पाले ही नहीं कि जिन्हें छोड़ कर गैस और पेट्रोल वगैरह वगैरह...वगैरह की  इज्ज़त रख लूं  ! 

दुनियादार इंसान हूं सो मुल्क से पहले अपनी सोचता हूं , उसने कहा अब जिंदगी  कटेगी कैसे ? मैने कहा , जिन्हें  इश्क होता है वो जैसे तैसे काट ही लेते हैं ! फिर उसने कहा...लेकिन सरकार -ए -मादरे वतन से इश्क है ही किसे ? मैंने कहा , उन्हें , जिन्होंने उसे वोट देकर अज़मत बख्शी !...और आप ? नहीं मैं तो हरगिज़ भी नहीं , मैं जो होता , कह  ही देता...तुम्हारा चाहने वाला खुदा की दुनिया में मेरे सिवा भी कोई और हो खुदा ना करे  !





24 टिप्‍पणियां:

  1. , जिन्हें इश्क होता है वो जैसे तैसे काट ही लेते हैं !sahi kah rahe hain ali ji aap aur ab to ye 50 rupay aapki jeb se katte hi rahenge.

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  2. अली सा!!

    देर आयद पर तहे दिल से इस्तकबाल क़ुबूल फ़रमाइये... ये पचास रुपये की चपत (अम्मा कभी लगाती थीं हमारे गालों पर, अब "मॉम ऑफ द सरकार-ए-मादर-ए-वतन बज़रिये मौनमोहन लगाती हैं)... चलिये हम भी यही कहके इस दिल-ए-नादाँ को समझा लेते थे कि हमने तो वोट देकर उसे अज़्मत नहीं बख्शी... तभी किसी रिसाले में पढा कि जम्हूरियत वो तर्ज़-ए-हुक़ूमत है जहाँ नुमाइन्दे वे चुनते हैं जो वोट नहीं देते..
    ख़ैर..वापसी आपकी हमारे लिये बाद-ए-नसीम की तरह है!! शुक्रिया आपकी आमद का!

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  3. शायद इसीलिए कहा गया है- काल करै सो आज कर...

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  4. @ लेकिन सरकार -ए -मादरे वतन से इश्क है ही किसे...

    संक्षिप्त पोस्ट ... मगर सोंचने के लिए मजबूर कर दिए आपने !
    हकीकत बयान कोई करना ही नहीं चाहता !
    शुभकामनायें !!

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  5. वाह. यह तो वही बात हुई:

    करता हूँ जमा फिर ज़िगर-ए-लख़्त-लख़्त को
    अरसा हुआ है दावत-ए-मिश्गां किये हुए.

    मैं तो जब कभी बढ़ते खर्चों का ज़िक्र करता हूँ, तब इंटरनेट पर होनेवाले खर्चे की बात उठने लगती है इसलिए चुपाई मारकर बैठे रहता हूँ.

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  6. "तुम्हारा चाहने वाला खुदा की दुनिया में मेरे सिवा भी कोई और हो खुदा ना करे !"
    किसी के लिए (किसके लिए :) ?) यह सन्देश है बाकी तो आपने झूठ मूठ का किस्सा छेड़ा है ताकि लोग और अपनी लुगायी भी भरमायी रहे .... :)

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  7. .
    .
    .
    अली साहब,

    अब आप भी ऐसा लिखेंगे तो कैसे चलेगा ? पहली जुलाई के बाद कभी भी महंगाई भत्ते की नई किस्त जो ७ प्रतिशत से ज्यादा ही होगी, जारी हो ही जायेगी... एक महीने की ही परेशानी है... सो, चीयर अप... :)



    ...

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  8. @ शालिनी जी ,
    बहुत शुक्रिया !
    वैसे दो सिलेंडर गैस और चालीस लीटर पेट्रोल की बढ़ी हुई कीमत का भार कुछ ज़्यादा ही बनता है जो अपनी जेब से कटने वाला है :)

    @ चला बिहारी ब्लॉगर बनने ,
    भाई,बेहतरीन प्रतिक्रिया देने और वापसी पर खुशामदीद कहने के लिए ह्रदय से आभार !

    @ राहुल सिंह जी ,
    आज करै सो काल कर...वाली गलती हमसे हो ही गयी :)

    @ सतीश भाई ,
    सरकार जीना मुहाल कर दे सो मंज़ूर पर आपका टिप्पणी बाक्स खुलवाने के लिए जो कहें सो करूं !

    @ निशांत जी ,
    आपने दुखती रग पर हाथ धर दिया अगर श्रीमती अली ने आपकी टिप्पणी पढ़ ली तो बड़ी मुश्किल हो जायेगी ! इंटरनेट तो मैं एकता कपूर के सीरियल्स की टक्कर (मुक़ाबिल) में चलाये जा रहा था अब तक :)

    @ अरविन्द जी ,
    तुझे क्या सुनाऊं मैं दिलरुबा तेरे सामने मेरा हाल है :)

    @ प्रवीण शाह साहब ,
    अव्वल तो जनवरी की छै फीसद किश्त ही हमें अक्टूबर में मिलने वाली है तो जुलाई ११ का मतलब अप्रैल १२ ही हुआ :)
    हमारी सरकार नौ माह के मसले में कोई कोताही नहीं करती :)

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  9. टिप्पणी बॉक्स खोल दिया है गुरुवर ! आपका स्वागत और इंतज़ार है !

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  10. तुम्हारा चाहने वाला खुदा की दुनिया में मेरे सिवा भी कोई और हो खुदा ना करे !

    but apun chahte hain....apan ko chor
    kar aur....bahut sare aapke chahne wale hon........

    pranam.

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  11. खुदा की दुनिया में तो होकर डूबे,
    अब नाखुदा को भी आजमा लेंगे।

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  12. करता हूँ जमा फिर ज़िगर-ए-लख़्त-लख़्त को
    अरसा हुआ है दावत-ए-मिश्गां किये हुए.

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  13. दुनियादार इंसान हूं सो मुल्क से पहले अपनी सोचता हूं ,

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  14. @ सतीश भाई ,
    शुक्रिया हाज़िरी लगा दी है !

    @ संजय जी ,
    बहुत बहुत आभार !

    @ मो सम कौन ? जी,
    ये ना हो कि वो हमसे पूछे ,
    तैर पाओगे तो उस पार चलें :)

    @ अमरेन्द्र भाई ,
    आप और निशांत जी के लिए वाह !

    @ हेम पाण्डेय जी ,
    तंज को तंज के तौर पर ही लीजियेगा ! संवाद को सन्दर्भ से काट कर ना देखा जाये !

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  15. @कमाल के लोग हैं वे जिन्हें अपनी छोड़ , देश की फिक्र खाये जा रही है और एक मैं हूं जो अपनी ही में मुब्तिला हूं !


    सर, वो लोग जो देश के लोगों की फ़िक्र करने का बिजनेस करते हैं उन्हें और उनकी आने वाली अनेकों पुश्तों को गैस के सिलेंडर और गाड़ी के पेट्रोल की चिंता नहीं रहती ....

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  16. baton hi baton me ishara kar gaye
    badhai kabule!

    ये महगाई नही आसान,बस इतना समझ लीजिये
    रुखा-सूखा था जो भी, वो हाथ से छिन जाना है

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  17. कोई व्यसन पाले ही नहीं

    हाँ आप तो ये कह सकते हैं...:)

    पोस्ट भी तो इतने दिनों बाद लिखते हैं...इंटरनेट का भी उलाहना नहीं मिल सकता.

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  18. मुझे तो आज तक अनुमान ही न था कि मैं कितनी बचत करती हूँ। घुघूत को बताना पड़ेगा। दो सिलिन्डर तो जब बच्चे घर में थे, नित मेहमान आते थे और थोक के भाव भोजन बनता था तब भी नहीं लगते थे। पीने से लेकर कुल्ले के लिए भी पानी उबालने पर भी न लगते थे। माइक्रोवेव व तन्दूर जब नहीं खरीदा था तब भी नहीं। अभी जब हम दो प्राणी ही हैं और पानी उबालना भी बन्द कर दिया तब कितने दिन चलता है बताना उचित न होगा। पूछना चाहोगे तो पूछ ही लोगे, यह अलग बात है। :)
    घुघूती बासूती

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  19. @ विचार शून्य जी,
    उनकी और हमारी फिक्रों में बड़ा अन्तर है ! एक तो ये कि हमारी फिक्रें उनके ही कारण है !

    @ आलोक जी ,
    लक्षण तो यही दिखाई दे रहे हैं !

    @ रश्मि जी ,
    इंटरनेट का उलाहना संभावित तो है ही :)

    @ घुघूती जी ,
    पूछ तो लूंगा ही :)

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  20. एक सप्ताह में गैस कम्पनियों ने खूब कमा लिया ...दाम में 25 रूपये की कमी होने से पहले सब बेच डाले , इन सात दिनों में गैस की कहीं किल्लत नहीं थी ...
    का करें , हमेशा ही सकारात्मक सोचते हैं :)

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  21. दुनियादार इंसान हूं सो मुल्क से पहले अपनी सोचता हूं , उसने कहा अब जिंदगी कटेगी कैसे ? मैने कहा , जिन्हें इश्क होता है वो जैसे तैसे काट ही लेते हैं

    सभी यहाँ जस तस काट रहे हैं ज़िंदगी ... अभी तो बिजली भी मंहगी होने वाली है ...और सरकार वोटर लिस्ट बनाने में कितना खर्च करती है पर हमारा तो अभी तक नाम ही नहीं आया लिस्ट में .. न जाने कितनी बार फ़ार्म भरवा कर ले जा चुके हैं ... तो हमने भी नहीं चुनी सरकार ..

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  22. ....मतलब यह पुरानी बीमारी है.......अब तो हमें भी लग गई !

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