मंगलवार, 8 दिसंबर 2009

राहुल बाबा ये क्या कह डाला आपने ...?

टीवी न्यूज और अख़बारों की सुर्खियां बने राहुल गांधी , उत्तर प्रदेश में गुमशुदा जनाधार की तलाश में भटकते हुए अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी पहुंचे और कुछ ऐसा कह गये जोकि मुसलमानों के लिये डूब मरने का विषय है ! उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बनने में धर्म कोई मसला नहीं है , यहां सिर्फ इस बात पर ध्यान दिया जाता है कि आप कितने 'योग्य' और 'सक्षम' हैं , कोई भी मुसलमान इस पद पर बैठ सकता है ,बशर्ते वह इसके लिये सबसे योग्य हो ! कहने का मतलब ये कि देश की आजादी के ६२ वर्षों में , कांग्रेस के राजकाज के दौरान , देश के प्रधानमंत्री बनाये जाने की योग्यता जो भी रही हो वो किसी भी मुसलमान ( मेरा मतलब कांग्रेसी मुसलमान ) के पास नहीं थी और ना है ! अगर इस तर्क से सहमत हुआ जाये तो कांग्रेस को , मुसलमानों में , प्रधानमंत्री ही क्यों , रक्षा मंत्री और गृहमंत्री बनने की 'योग्यता' भी नहीं मिली !
राहुल बाबा ये क्या कह डाला आपने ...? आपकी माने , तो क्या जस्टिस हिदायतउल्लाह और जाकिर हुसैन ...वगैरह...वगैरह.... इतने गये गुज़रे थे कि ....? ? ? अब ये मत कहियेगा कि उनमें केवल देश का प्रथम नागरिक बनने लायक 'योग्यता और सक्षमता' ही थी !
ये तो सभी जानते हैं कि इस देश का 'मुसलमान' पदेन 'रबर स्टाम्प' और 'वोट बैंक' के तौर पर ही 'शोभा' देता है ! आप राजनीति करें , वोट बैंक ढूंढें , अगले .....और अगले...... और और अगले प्रधानमंत्री बनें , ये तो ठीक है पर कम से कम 'मुसलमानों' को अयोग्य तो ना कहें !

टीप :
योग्यता और सक्षमता का धर्म /जाति /प्रजाति आधारित निर्धारण किया जाना अनुचित विचार है ! लोकतान्त्रिक देश में इस तरह के चिंतन की शुरुआत किसने की , यह तो पता नहीं पर यह सोच देश के स्वास्थ्य के लिए चिंता का कारण जरुर है !

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